सीजी भास्कर, 31 मई : छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले से अन्नदाताओं (Jashpur Fertilizer Scam) की पीठ पर छुरा घोंपने वाली एक बेहद सनसनीखेज और आंखें खोल देने वाली वारदात सामने आई है। यहां खेतों में पसीना बहाकर देश का पेट भरने वाले सीधे-साधे किसानों को चूना लगाने का एक बड़ा कूटनीतिक खेल खेला जा रहा था।
रबी और खरीफ फसलों के सीजन में जब किसानों को सबसे ज्यादा खाद की जरूरत होती है, ठीक उसी वक्त जिले के भीतर नकली खाद को असली बताकर ऊंचे दामों पर खपाने वाले गिरोह सक्रिय हो गए हैं। डीएपी (Di-ammonium Phosphate) की भारी किल्लत और मांग का फायदा उठाकर ये जालसाज भोले-भोले ग्रामीणों की गाढ़ी कमाई लूटने में लगे थे। इस पूरे खेल का सस्पेंस तब खत्म हुआ जब कृषि विभाग को इसकी भनक लगी और उसने एक तगड़ा जाल बिछाकर आरोपियों के मंसूबों पर पानी फेर दिया।
दरअसल, पूरा मामला विकासखंड फरसाबहार के ग्राम पंचायत खारीबहार का है। यहां काफी समय से कृषि विभाग को चोरी-छिपे खाद (Jashpur Fertilizer Scam) की अवैध डंपिंग और कालाबाजारी की गुप्त सूचनाएं मिल रही थीं। उप संचालक कृषि एमआर भगत को जैसे ही पक्की मुखबिरी मिली, उन्होंने तत्काल अधिकारियों की एक विशेष आपातकालीन टास्क फोर्स का गठन किया। कृषि विभाग पत्थलगांव एवं फरसाबहार की इस संयुक्त टीम ने जब अचानक चिन्हित मकान पर धावा बोला, तो वहां का नजारा देखकर खुद अधिकारी भी दंग रह गए। कमरे के भीतर डीएपी के नाम पर अवैध रूप से भारी मात्रा में भंडारित उर्वरक (Jashpur Fertilizer Scam) का एक विशाल जखीरा छिपाकर रखा गया था।
जांच अधिकारियों ने जब बोरियों को खोलकर उनके भीतर की सामग्री की बारीकी से जांच की, तो पता चला कि यह कोई रासायनिक डीएपी खाद नहीं बल्कि भूमि शक्ति ब्रांड का साधारण आर्गेनिक ग्रेनुअल (ऑर्गेनिक ग्रेन्युलर) था। मुनाफे के लालच में इस साधारण खाद (Jashpur Fertilizer Scam) को ब्रांडेड और असली डीएपी बताकर ऊंचे दामों पर बेचने की पूरी तैयारी कर ली गई थी। टीम ने मौके से कुल 342 बोरी यानी करीब 17.1 टन अवैध उर्वरक (Jashpur Fertilizer Scam) बरामद किया, जिसे तत्काल प्रभाव से जब्त कर लिया गया।
इस पूरे मामले की गंभीरता और क्षेत्र के किसानों में पनपते भारी आक्रोश को देखते हुए पत्थलगांव के अनुविभागीय अधिकारी (SDM) राकेश पैंकरा खुद दल-बल के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने बिना वक्त गंवाए पूरे अवैध भंडारण (Jashpur Fertilizer Scam) वाले परिसर को सरकारी ताला लगाकर सील कर दिया। इसके साथ ही जरूरी वैधानिक कागजी कार्रवाई पूरी करते हुए जब्ती का यह कड़ा प्रकरण आगे की बड़ी दंडात्मक कार्रवाई के लिए कार्यालय उप संचालक कृषि, जशपुर को सौंप दिया गया है।
अवैध रूप से की जा रही इस बिक्री (Jashpur Fertilizer Scam) ने क्षेत्र के हजारों किसानों की चिंताएं बढ़ा दी हैं, क्योंकि अगर यह नकली माल खेतों में डाल दिया जाता तो फसलों की बर्बादी तय थी। उप संचालक कृषि भगत ने इस बड़ी कार्रवाई के बाद स्थानीय किसानों से कड़े शब्दों में अपील की है कि वे किसी भी राह चलते अज्ञात वेंडर या अवैध ठिकाने से सामान खरीदने की भूल बिल्कुल न करें। किसानों को अपनी फसलों की सुरक्षा के लिए केवल और केवल शासन द्वारा अधिकृत लायसेंसधारी विक्रेताओं से ही उर्वरक (Jashpur Fertilizer Scam) एवं कृषि आदान क्रय करना चाहिए और उसकी पक्की कंप्यूटराइज्ड रसीद भी अनिवार्य रूप से मांगनी चाहिए। यदि कहीं भी ऐसी संदिग्ध गतिविधि या अवैध कालाबाजारी दिखे, तो उसकी सूचना तुरंत विभाग को दें।
इस पूरी छापामार कार्रवाई को अंजाम देने और मिलावटखोरों की कमर तोड़ने में वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी नन्दे भगत, उर्वरक निरीक्षक देवकांत अजगल्ले, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी किशन कुशवाहा एवं मुकेश सिंह सहित पूरी टीम की बेहद जांबाज भूमिका रही। फिलहाल प्रशासन इस बात के सस्पेंस को खंगालने में जुटा है कि इस रैकेट के तार और कहां-कहां जुड़े हैं।




