सीजी भास्कर, 6 सितंबर : झीरम हमला (Jhiram Attack) मामले में अदालत के फैसले के बाद अब जांच की दिशा और मुख्य आरोपियों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। जिन नक्सली नेताओं को मामले में प्रमुख आरोपी बताया गया था, उनकी गिरफ्तारी और पूछताछ नहीं हो सकी। इनमें तिमिरी तिरूपति उर्फ देवजी और बारसे सुक्का उर्फ देवा प्रमुख नाम हैं। दोनों अलग-अलग समय पर तेलंगाना में सरेंडर कर चुके हैं, लेकिन झीरम मामले में उनसे पूछताछ नहीं होने की बात सामने आई है।
जांच में नाम आया, फिर भी पूछताछ से बाहर
जांच एजेंसी ने वर्ष 2013 में झीरम हमला (Jhiram Attack) मामले में केस दर्ज किया था। जांच के दौरान देवजी और देवा समेत कई नक्सलियों को फरार घोषित किया गया था। दिसंबर 2023 में जारी वांटेड नोटिस में भी दोनों के नाम और तस्वीरें शामिल थीं। इसके बावजूद सरेंडर के बाद उन्हें झीरम मामले में गिरफ्तार नहीं किया गया।
यह भी पढ़ें…Collector Teacher : शिक्षक दिवस पर कलेक्टर बने शिक्षक, 8 शिक्षक मिले गैरहाजिर; नोटिस के निर्देश
झीरम की साजिश में देवजी की अहम भूमिका का दावा
जांच के मुताबिक, घटना के समय देवजी दक्षिण क्षेत्रीय एकीकृत कमान का वरिष्ठ कमांडर था। फरवरी 2013 में बीजापुर के पिड़िया में हुई बैठक में सुरक्षा बलों पर हमले की योजना पर चर्चा हुई थी। बाद में हमले का स्थान मिनपा से बदलकर दरभा करने का निर्णय लिया गया। इसके बाद कई सशस्त्र टुकड़ियों को दरभा क्षेत्र में भेजे जाने की बात जांच में सामने आई। झीरम हमला (Jhiram Attack) मामले में देवजी की भूमिका को लेकर जांच एजेंसी ने महत्वपूर्ण दावे किए थे।
यह भी पढ़ें…Jashpur Axe Murder Case : बेटी को परेशान करने से रोकना पड़ा भारी, मां की कुल्हाड़ी से हत्या
देवा पर भी हमले की नेतृत्व भूमिका का आरोप
बारसे सुक्का उर्फ देवा दरभा डिवीजन कमेटी का सचिव रहा और बाद में एक बटालियन का कमांडर बना। जांच में उसकी नेतृत्व भूमिका में दरभा में हमला किए जाने का उल्लेख है। नंदकुमार पटेल और उनके बेटे दिनेश पटेल की हत्या से जुड़े घटनाक्रम में भी उसका नाम सामने आया था।
यह भी पढ़ें…Bigg Boss 20 : मनोज तिवारी की बेटी रीति तिवारी की एंट्री, सिंगिंग से राजनीति तक ऐसा रहा सफर
गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ ही चला ट्रायल
मामले की जांच के दौरान 11 नक्सलियों के खिलाफ मुकदमा चला, जबकि इनमें से एक की मौत हो चुकी है। अभियोजन पक्ष ने अदालत में 101 गवाह और दस्तावेज पेश किए। जांच एजेंसी की ओर से कहा गया कि जिन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और जिनके खिलाफ चार्जशीट पेश हुई, अदालत में उन्हीं के खिलाफ ट्रायल चला।
जांच के दौरान 19 फरार नक्सलियों की जानकारी भी सार्वजनिक की गई थी। इनमें देवजी और देवा के अलावा कई अन्य नक्सली शामिल थे। बाद में कुछ आरोपियों के मारे जाने या सरेंडर करने की जानकारी सामने आई।
यह भी पढ़ें…इंडोनेशिया में ज्वालामुखी विस्फोट से हड़कंप, 50 हजार फीट तक पहुंची राख; 209 उड़ानें प्रभावित
सरेंडर के बाद पूछताछ को लेकर उठे सवाल
पूर्व पुलिस अधिकारी आरके विज के अनुसार, सरेंडर नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के खिलाफ सीधे कानूनी कार्रवाई की स्थिति अलग हो सकती है, लेकिन किसी मामले की जांच के लिए उनसे पूछताछ करने पर रोक नहीं है। उनका कहना है कि झीरम मामले में नामजद आरोपियों से पूछताछ होने पर जांच को नई दिशा मिल सकती है।
झीरम हमला (Jhiram Attack) 25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के दौरान हुआ था। इस हमले में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, महेंद्र कर्मा, विद्याचरण शुक्ल समेत 32 लोगों की मौत हुई थी। घटना के दो दिन बाद जांच शुरू की गई थी। बाद में गिरफ्तार आरोपियों के बयानों के आधार पर कई अन्य नक्सलियों को भी मामले में आरोपी बनाया गया।
खबरें और भी हैं, पढ़ें : Delhi Rain Traffic Jam : दिल्ली में बारिश से हाहाकार, 200+ फ्लाइट्स लेट; कई इलाकों में ट्रैफिक जाम




