सीजी भास्कर, 31 अक्टूबर। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठतम न्यायाधीश सूर्यकांत को भारत का अगला प्रधान न्यायाधीश (CJI) नियुक्त किया गया है। वे (Justice Surya Kant Appointed CJI) वर्तमान सीजेआई बी.आर. गवई के सेवानिवृत्त होने के बाद यह पद संभालेंगे। जस्टिस गवई 23 नवंबर को सेवानिवृत्त होंगे और जस्टिस सूर्यकांत 24 नवंबर को शपथ लेकर कार्यभार ग्रहण करेंगे।
सीजेआई के रूप में जस्टिस सूर्यकांत का कार्यकाल लगभग 14 महीने का होगा और वे 9 फरवरी 2027 को सेवानिवृत्त होंगे। जस्टिस सूर्यकांत ने अपने न्यायिक करियर में कई ऐतिहासिक फैसलों में अहम भूमिका निभाई है वे अनुच्छेद 370, पेगासस जासूसी प्रकरण, और बिहार एसआईआर केस (Justice Surya Kant Appointed CJI) जैसी महत्वपूर्ण संवैधानिक पीठों का हिस्सा रह चुके हैं।
राष्ट्रपति ने दी औपचारिक मंजूरी
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने संविधान के अनुच्छेद 124(2) के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए जस्टिस सूर्यकांत को भारत का प्रधान न्यायाधीश नियुक्त किया है। इससे पहले, परंपरा के अनुसार सीजेआई गवई ने ही जस्टिस सूर्यकांत को अपने उत्तराधिकारी के रूप में नामित करने की सिफारिश (Justice Surya Kant Appointed CJI) की थी। केंद्रीय विधि मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने एक्स (X) पर पोस्ट कर उनकी नियुक्ति की जानकारी साझा करते हुए उन्हें बधाई दी।
छोटे शहर से देश के सर्वोच्च न्यायिक पद तक
जस्टिस सूर्यकांत का जन्म 10 फरवरी 1962 को हरियाणा के हिसार जिले में एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ। उन्होंने एक साधारण वकील के रूप में अपना करियर शुरू किया और मेहनत, निष्ठा और उत्कृष्ट न्यायिक दृष्टिकोण के बल पर देश के सर्वोच्च न्यायिक पद तक पहुंचे। वे 9 जनवरी 2004 को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में स्थायी न्यायाधीश नियुक्त हुए। इसके बाद 5 अक्टूबर 2018 हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने फिर 24 मई 2019 को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश पद पर पदोन्नति मिली।
ऐतिहासिक फैसलों में अहम भूमिका
जस्टिस सूर्यकांत उस पीठ का हिस्सा रहे, जिसने राजद्रोह कानून (Sedition Law) पर ऐतिहासिक आदेश जारी करते हुए कहा था कि जब तक कानून की पुन: समीक्षा नहीं होती, तब तक कोई नई एफआईआर दर्ज न की जाए।
वह बिहार एसआईआर मामले की अध्यक्षता करने वाली पीठ के भी प्रमुख न्यायाधीश हैं, जिसने चुनाव आयोग से 65 लाख मतदाताओं के डेटा का ब्यौरा मांगा था। इसके अलावा, वे उस संवैधानिक पीठ में भी शामिल थे, जो राष्ट्रपति और राज्यपालों की शक्तियों से संबंधित प्रेसिडेंशियल रेफरेंस मामले की सुनवाई कर रही है जिसका प्रभाव देश के सभी राज्यों पर पड़ सकता है।


