सीजी भास्कर, 25 अगस्त : सनातन धर्म में कार्तिक अमावस्या पर श्री-समृद्धि का पर्व दीपावली मनाया जाता है। इस वर्ष कार्तिक अमावस्या दो दिन मिल रही है।
इसमें पहले दिन 20 अक्टूबर को दीप ज्योति पर्व दीपावली (Kartik Amavasya 2025) मनाया जाएगा। दूसरे दिन 21 अक्टूबर को स्नान-दान की अमावस्या होगी। कार्तिक अमावस्या तिथि 20 अक्टूबर को दिन में 2.56 बजे लग रही, जो 21 अक्टूबर को शाम 4.26 बजे तक रहेगी।
निर्णय सिंधुकार ने लिखा है कि-‘पूर्वत्रैव प्रदोषव्याप्तो लक्ष्मीपूजनादौ पूर्वा।’ धर्म सिंधु के वचनानुसार कार्तिक कृष्ण अमावस्या के प्रदोष काल में दीपावली का पर्व होता है। इसमें प्रदोष काल में ही दीपदान, लक्ष्मी पूजन आदि करने का आदेश है। अत: 20 अक्टूबर को प्रदोष काल में अमावस्या मिलने से दीपावली मनाना शास्त्र सम्मत होगा।
अमावस्या दो दिन मिलने से तिथि-पर्व भ्रम का निवारण करते हुए ज्योतिषाचार्य पं. ऋषि द्विवेदी के अनुसार, 20 अक्टूबर को प्रदोष व निशीथ काल (Diwali Puja Muhurat) दोनों में कार्तिक अमावस्या तिथि मिलने से दीपावली 20 अक्टूबर को मनाया जाना शास्त्र सम्मत होगा। 21 अक्टूबर को सूर्यास्त शाम 5.40 बजे हो रहा। अर्थात् अमावस्या 21 अक्टूबर को सूर्यास्त से पूर्व ही समाप्त हो जा रही है और सायं 4.26 के बाद कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा तिथि लग जाएगी।
ब्रह्म पुराण में कार्तिक अमावस्या को लक्ष्मी कुबेर आदि के रात्रि भ्रमण के बारे में बताया गया है। इस अनुसार भी प्रदोष व रात्रि व्यापिनि कार्तिक अमावस्या तिथि 20 अक्टूबर को ही प्राप्त होगी। प्रदोष काल सूर्यास्त के बाद दो घटी रहता है।
एक घटी 24 मिनट का होता है। अर्थात सूर्यास्त से 48 मिनट का समय प्रदोष काल होता है जो 20 अक्टूबर को ही मिलेगा। वहीं, 21 अक्टूबर को कार्तिक अमावस्या स्नान-दान श्राद्ध की होगी। इस बार कार्तिक अमावस्या पर भौमवती अमावस्या होने से इस दिन गंगा स्नान सहस्त्र सूर्य ग्रहण का फल देने वाला होगा।
पूजन मुहूर्त
दीपावली पूजन का मुख्य काल प्रदोष काल है। इसमें स्थिर लग्न की प्रधानता आवश्यक है। स्थिर लग्न वृष शाम 7.10 बजे से रात 9.06 बजे तक है। इस वर्ष दिन का स्थिर लग्न कुंभ दिन में 2.34 बजे से शाम 4.05 बजे तक होगा। सिंह लग्न मध्य रात्रि के बाद आने से निशीथ काल में महाकाली पूजन होगा।