राजधानी रायपुर की महत्वाकांक्षी Kharun Riverfront Project Cancelled की घोषणा के साथ शहर के विकास को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। साबरमती मॉडल पर तैयार इस परियोजना का उद्देश्य खारुन नदी के दोनों किनारों को आधुनिक रिवर फ्रंट के रूप में विकसित करना था, लेकिन शासन स्तर पर अंतिम स्वीकृति न मिलने के चलते यह योजना पूरी तरह रद्द कर दी गई।
45 किलोमीटर का सपना अधूरा
इस परियोजना के तहत खारुन नदी के लगभग 45 किलोमीटर लंबे हिस्से में सड़क, पैदल पथ, हरियाली, लाइटिंग और सार्वजनिक सुविधाओं का विकास प्रस्तावित था। करीब 550 करोड़ रुपये के बजट के साथ इसे शहर की पहचान बदलने वाली योजना माना जा रहा था, लेकिन तकनीकी आपत्तियों और वित्तीय स्वीकृति के अभाव ने इस सपने को रोक दिया।
अब सीमित सौंदर्याकरण पर फोकस
पूरे रिवर फ्रंट के रद्द होने के बाद शासन ने अब केवल Mahadev Ghat Development Plan (Riverfront Redevelopment) को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। इसके लिए 108 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है, जिसमें घाट क्षेत्र का सौंदर्याकरण, घाटों का विस्तार और बुनियादी सुविधाएं शामिल होंगी।
आमदी से बेंद्री तक की योजना भी ठप
पहले इस परियोजना को तीन चरणों में लागू करने की तैयारी थी—आमदी से भाटागांव, भाटागांव से चंदनडीह और चंदनडीह से बेंद्री तक। लेकिन अब यह Three Phase River Plan भी फाइलों तक ही सीमित रह गया है।
अन्य विकास कार्य भी अटके
खारुन रिवर फ्रंट के साथ-साथ राजधानी के कई अहम इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट भी मंजूरी के इंतजार में हैं। मोवा–जोरा एक्सप्रेस-वे, पंडरी थाना ओवरब्रिज और खमतराई रेलवे क्रॉसिंग का चौड़ीकरण जैसे प्रोजेक्ट अभी भी शासन की स्वीकृति की राह देख रहे हैं।
विशेषज्ञों की चिंता
शहरी विकास से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार रद्द और अधूरे प्रोजेक्ट राजधानी की दीर्घकालिक योजना को कमजोर कर रहे हैं। Urban Development Impact (City Planning Delay) के चलते आम नागरिकों को वह सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं, जिनका वादा योजनाओं में किया जाता है।




