सीजी भास्कर, 16 मई। बिलासपुर में चर्चित बाल अपहरण मामले को लेकर शनिवार को फिर लोगों के बीच चर्चा (Kidnapping) तेज रही। अदालत के फैसले के बाद शहर में कई जगहों पर इसी घटना की बात होती रही। जिन इलाकों में कभी इस घटना को लेकर दहशत फैली थी, वहां अब फैसले को लेकर अलग तरह की प्रतिक्रिया देखने को मिली। लोगों का कहना है कि छोटे बच्चों को निशाना बनाने वाले मामलों में सख्ती जरूरी है ताकि समाज में डर फैलाने वालों को स्पष्ट संदेश मिल सके।
सुबह से अदालत परिसर के बाहर हलचल बनी रही। फैसले की खबर सामने आने के बाद परिवार से जुड़े लोग भी भावुक नजर आए। कई लोगों ने कहा कि जिस तरह मासूम बच्चे को अगवा कर फिरौती मांगी गई थी, उसने पूरे शहर को हिला दिया था। अब अदालत के फैसले को लोग बड़ी कार्रवाई के रूप में देख रहे हैं।
छह साल के बच्चे को घर के बाहर से उठाया गया था : Kidnapping
साल 2019 में कारोबारी विवेक सराफ के छह वर्षीय बेटे विराट सराफ का उस समय अपहरण कर लिया गया था, जब वह घर के बाहर खेल रहा था। आरोपियों के बारे में बताया गया कि वे सफेद रंग की बिना नंबर वाली कार से पहुंचे थे और बच्चे को जबरन अपने साथ ले गए थे। घटना के अगले दिन पिता के पास फोन पहुंचा और छह करोड़ रुपए की फिरौती मांगी गई। साथ ही बच्चे को नुकसान पहुंचाने की धमकी भी दी गई थी।
लगातार तलाश के बाद मिला था बच्चा
घटना के बाद पुलिस ने कई दिनों तक अलग अलग इलाकों में जांच और तलाश अभियान चलाया। लगातार छह दिन तक टीम लगी रही और सातवें दिन जरहाभाठा क्षेत्र के एक मकान से बच्चे को सुरक्षित निकाल लिया गया। मौके से एक आरोपी पकड़ा गया था। इसके बाद पूछताछ और जांच के आधार पर पूरे गिरोह तक पुलिस पहुंची और सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।
परिवार की महिला पर साजिश रचने का आरोप
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि इस पूरे मामले की साजिश विराट की बड़ी मां नीता सराफ ने तैयार (Kidnapping) की थी। पुलिस के अनुसार उस पर काफी कर्ज था और पैसों की जरूरत के कारण उसने अपने साथियों के साथ मिलकर योजना बनाई थी। शुरुआत में परिवार के दूसरे बच्चे को निशाना बनाने की कोशिश हुई थी, लेकिन योजना पूरी नहीं हो सकी। बाद में विराट को अगवा किया गया।
पुलिस जांच में यह बात भी सामने आई कि घटना के बाद भी नीता सराफ रोजाना पीड़ित परिवार के घर पहुंचती थी और वहां की जानकारी अपने साथियों तक पहुंचा रही थी। कॉल रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज, फिंगरप्रिंट और आवाज के नमूनों समेत कई तकनीकी सबूतों के जरिए पुलिस ने पूरा मामला मजबूत किया।
अदालत ने कहा समाज में डर फैलाते हैं ऐसे अपराध
मामले में निचली अदालत ने दो वर्ष पहले पांचों दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसी फैसले को चुनौती देते हुए आरोपियों ने हाईकोर्ट में अपील लगाई थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने माना कि पूरा अपहरण पहले से बनाई गई योजना के तहत किया गया था और इसका मकसद फिरौती वसूलना था।
अदालत ने कहा कि मासूम बच्चों के अपहरण जैसे अपराध केवल एक परिवार को ही नहीं तोड़ते, बल्कि पूरे समाज में भय और असुरक्षा का माहौल पैदा (Kidnapping) कर देते हैं। अदालत ने पुलिस द्वारा पेश किए गए तकनीकी और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को भरोसेमंद माना और सभी दोषियों की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा। साथ ही किसी भी प्रकार की राहत देने से साफ इनकार कर दिया।



