सीजी भास्कर, 15 जनवरी। छत्तीसगढ़ में धान उपार्जन व्यवस्था को पारदर्शी, सरल और किसान-केंद्रित बनाने की दिशा में राज्य सरकार द्वारा उठाए गए डिजिटल कदम अब जमीन पर असर दिखाने (Kisan Tunhar Token App) लगे हैं। किसान तुंहर टोकन मोबाइल ऐप के जरिए घर बैठे ऑनलाइन टोकन प्राप्त करने की सुविधा ने धान विक्रय प्रक्रिया को पूरी तरह सुव्यवस्थित कर दिया है। इस व्यवस्था से न केवल समिति कार्यालयों में भीड़ कम हुई है, बल्कि किसानों का समय और मेहनत दोनों की बचत भी हो रही है।
अंबिकापुर विकासखंड के ग्राम पंचायत करजी के लघु सीमांत किसान धर्मसाय ने बताया कि उनके पास कुल 84 क्विंटल धान का उत्पादन है, जिसमें से उन्होंने 64 क्विंटल धान विक्रय के लिए किसान तुंहर टोकन ऐप के माध्यम से ऑनलाइन टोकन (Kisan Tunhar Token App) प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि पहले टोकन के लिए समितियों के चक्कर लगाने पड़ते थे, लेकिन अब मोबाइल ऐप से यह काम घर बैठे ही हो जाता है, जिससे अनावश्यक भागदौड़ खत्म हो गई है।
निर्धारित तिथि पर उपार्जन केंद्र पहुंचने पर गेट पास, धान की नमी जांच और बारदाना उपलब्ध कराने जैसी सभी प्रक्रियाएं बिना किसी परेशानी के पूरी हुईं। किसान ने बताया कि इस वर्ष धान खरीदी की व्यवस्था पहले की तुलना में कहीं अधिक व्यवस्थित और सुचारु रही है। उपार्जन केंद्रों पर पेयजल, छायादार बैठने की व्यवस्था और समिति कर्मचारियों का सहयोग किसानों के लिए बड़ी राहत साबित हो रहा है।
किसान धर्मसाय ने बताया कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा धान का समर्थन मूल्य ₹3100 प्रति क्विंटल तय किया गया है और प्रति एकड़ 21 क्विंटल तक धान की खरीदी (Kisan Tunhar Token App) की जा रही है। इससे किसानों की आय में सीधा इजाफा हुआ है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है। बेहतर आमदनी के चलते किसान अब धान के साथ-साथ गेहूं, तिलहन और सब्जी जैसी अन्य फसलों की खेती की ओर भी अग्रसर हो रहे हैं।
उन्होंने धान खरीदी की इस डिजिटल और पारदर्शी व्यवस्था को किसान हितैषी बताते हुए राज्य सरकार के प्रति आभार जताया। किसानों का कहना है कि आसान टोकन प्रणाली, बेहतर मूल्य और सुव्यवस्थित उपार्जन व्यवस्था से उनमें भरोसा बढ़ा है और छत्तीसगढ़ का कृषि तंत्र पहले से अधिक मजबूत हो रहा है।


