सीजी भास्कर, 05 जनवरी। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले से सामने आई एक घटना ने प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल (Korba Police Chowki Incident) मचा दी है। रजगामार पुलिस चौकी परिसर में एक आरक्षक के साथ मारपीट और जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल के आरोप में रामपुर विधायक के प्रतिनिधि जयकिशन पटेल को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। पुलिस ने मामले को गंभीर मानते हुए एससी-एसटी एक्ट समेत अन्य संबंधित धाराओं में प्रकरण दर्ज किया है।
रात में शुरू हुआ विवाद, चौकी तक पहुंचा मामला
पुलिस सूत्रों के अनुसार, 31 दिसंबर की रात आरक्षक विकास कोसले करतला थाने से डाक लेकर पुलिस अधीक्षक कार्यालय गए थे। ड्यूटी पूरी कर वे घर लौटे ही थे कि उनके ममेरे भाई राजेंद्र जांगड़े घबराए ((Korba Police Chowki Incident)) हुए पहुंचे और उनके साथ मारपीट किए जाने की जानकारी दी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आरक्षक अपने भाई के साथ सीधे रजगामार पुलिस चौकी पहुंचे, जहां शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू हुई।
शिकायत लिखते समय बढ़ा तनाव
शिकायत लिखे जाने के दौरान ही जयकिशन पटेल के चौकी पहुंचने की बात सामने आई है। आरोप है कि इसी दौरान माहौल अचानक बिगड़ गया। आरक्षक विकास कोसले के साथ कथित रूप से अभद्र व्यवहार किया गया और जातिगत टिप्पणी के साथ हाथापाई की गई। पुलिस चौकी जैसे संवेदनशील स्थान पर हुई इस घटना से कुछ देर के लिए अफरा-तफरी की स्थिति बन गई।
कानूनी दायरे में आई कार्रवाई
आरक्षक की ओर से लिखित शिकायत और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत किए जाने के बाद मामला आजाक थाना स्थानांतरित किया गया। जांच के दौरान एससी-एसटी एक्ट की धाराएं जोड़ी गईं। पूछताछ के लिए बुलाए जाने पर आरोपी से सवाल-जवाब ((Korba Police Chowki Incident)) किए गए, जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को न्यायिक रिमांड पर जेल भेजने का आदेश दिया।
पुलिस ने दिया स्पष्ट संदेश
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानून का उल्लंघन करने वाला चाहे किसी भी राजनीतिक या सामाजिक पहचान से जुड़ा हो, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। मामले की विवेचना जारी है और तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
यह घटना न केवल पुलिस चौकी की मर्यादा और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाती है, बल्कि यह भी स्पष्ट करती है कि कानून के दायरे से बाहर जाकर किया गया कोई भी कृत्य स्वीकार्य नहीं है।





