सीजी भास्कर, 20 नवंबर। मध्य प्रदेश में स्थित कूनो नेशनल पार्क (Kuno National Park) से एक बार फिर खुशी की खबर आई है। मादा चीता मुखी ने पांच स्वस्थ शावकों को जन्म दिया है। इसके साथ ही कूनो में चीतों का कुनबा एक बार फिर बढ़ गया है। खास बात यह है कि मादा मुखी पहली भारतीय जन्मी चीता है, जिसे नामीबिया से लाई गई मादा चीता ज्वाला ने मार्च 2023 में जन्म दिया था।
अब लगभग दो साल आठ महीने की उम्र में मुखी ने शावकों को जन्म देकर चीता प्रोजेक्ट को नई दिशा दे दी है। भारतीय मूल की चीता मादा से शावकों का जन्म होना परियोजना की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक माना जा रहा है।
कूनो नेशनल पार्क (Kuno National Park) में अफ्रीकी चीता प्रोजेक्ट 17 सितंबर 2022 को शुरू हुआ था, जब नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से कुल 20 चीते भारत लाए गए थे।
इनमें से कुछ चीतों की मृत्यु के बाद भी प्रोजेक्ट में प्रजनन को लेकर अनिश्चितता थी, लेकिन मादा ज्वाला ने 2023 और 2024 दोनों वर्षों में शावकों को जन्म देकर उम्मीद जगाई। अब मुखी द्वारा शावकों का जन्म यह दर्शाता है कि भारतीय वातावरण में चीतों की दूसरी पीढ़ी भी सफलतापूर्वक विकसित हो रही है।
प्रजनन के लिए अब अनुकूल हो चुका Kuno National Park
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अभी शावक और मां को पूरी तरह सुरक्षित, मानवीय हस्तक्षेप से मुक्त वातावरण दिया जा रहा है। शुरुआती दिनों में शावकों पर अत्यधिक नजर रखी जाती है क्योंकि यह अवधि संवेदनशील होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना न सिर्फ भारत में चीता पुनर्वास परियोजना की सफलता का प्रतीक है, बल्कि यह बताती है कि कूनो का प्राकृतिक परिवेश प्रजनन के लिए अब अनुकूल हो चुका है।
कूनो में वर्तमान में कई चीतों के प्रजनन की संभावना दिख रही है और इस जन्म के बाद वन विभाग तथा विशेषज्ञों में उत्साह और बढ़ गया है। भारत ने 1952 में चीतों को विलुप्त घोषित कर दिया था, लेकिन आज कूनो में नई पीढ़ी का जन्म यह साबित करता है कि देश एक बार फिर इस प्रजाति को संरक्षित और पुनर्जीवित करने की दिशा में मज़बूती से आगे बढ़ रहा है।





