सीजी भास्कर, 9 जनवरी। लालू यादव और उनके परिवार सहित 41 अन्य आरोपियों को लैंड फॉर जॉब मामले में कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। राउज एवेन्यू कोर्ट ने लैंड फॉर जॉब मामले में (Land For Job Case) आरोप तय कर दिए हैं। सीबीआई की विशेष अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह निर्णय लिया है। अब अगली प्रक्रिया के तहत ट्रायल शुरू होगा और आरोपियों के खिलाफ सबूत पेश किए जाएंगे।
कोर्ट के अनुसार, लालू यादव और उनके परिवार ने इस मामले में अचल संपत्ति जुटाई थी। इसमें उनकी पत्नी, बच्चे और करीबी सहयोगी शामिल हैं। अदालत का मानना है कि सभी आरोपियों ने इस पूरी प्रक्रिया में लालू यादव का समर्थन किया। लैंड फॉर जॉब मामले में (Land For Job Case) यह भी सामने आया है कि संपत्ति का आदान-प्रदान नौकरी के बदले किया गया।
सीबीआई ने आरोप लगाया है कि लालू यादव के रेल मंत्री रहते हुए रेलवे ग्रुप डी की नौकरियों के बदले जमीन ली गई। यह जमीन उनके परिवार और करीबी लोगों के नाम पर दर्ज करवाई गई थी। सभी आरोपियों ने इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए खारिज किया है। लैंड फॉर जॉब मामले में (Land For Job Case) सीबीआई ने स्पष्ट किया कि लालू यादव, उनकी पत्नी, बिहार की पूर्व सीएम राबड़ी देवी, बेटी मीसा भारती, बेटे तेजस्वी यादव और अन्य लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी।
सीबीआई का कहना है कि यह घटना 2004 से 2009 के बीच हुई, जब लालू यादव रेल मंत्री थे। रेलवे के पश्चिम मध्य क्षेत्र में ग्रुप डी की नौकरियों के बदले जमीन ली गई थी। कोर्ट ने माना कि आगे सुनवाई के लिए पर्याप्त आधार मौजूद हैं और ट्रायल के दौरान सभी सबूत पेश किए जाएंगे। लैंड फॉर जॉब मामले में (Land For Job Case) राजनीतिक और कानूनी हलचल बढ़ गई है और देश की नजरें इस मामले पर टिकी हुई हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला न केवल लालू यादव और उनके परिवार के लिए, बल्कि बिहार की राजनीति और केंद्रीय रेल मंत्रालय के प्रशासनिक मामलों के लिए भी महत्वपूर्ण है। आगे की सुनवाई में सबूत और गवाह पेश किए जाएंगे, जो लैंड फॉर जॉब मामले में (Land For Job Case) की दिशा तय करेंगे।


