सीजी भास्कर, 29 अगस्त : छत्तीसगढ़ के भैरमगढ़ अभयारण्य (इंद्रावती टाइगर रिजर्व क्षेत्र) में एक तेंदुए का शव मिलने से सनसनी फैल गई है। यह घटना वन्यजीव संरक्षण पर गंभीर सवाल खड़े करती है। शव माटवाड़ा से लगे पहाड़ी इलाके में मिला, जिसे ग्रामीणों ने सबसे पहले देखा और वन विभाग को तत्काल सूचना दी। मौके पर पहुंची टीम ने शव को अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।
ग्रामीणों ने बताया कि तेंदुआ बीते चार दिनों से जंगल की झाड़ियों में घायल अवस्था में तड़प रहा था। लोगों ने उसकी कराह को कुत्ते की आवाज समझकर नजरअंदाज कर दिया। ग्रामीणों का दावा है कि यदि समय पर इलाज मिल जाता, तो तेंदुए की जान बच सकती थी। यह लापरवाही वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाती है।
इंद्रावती टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर संदीप बलगा ने कहा कि तेंदुए के शरीर पर गहरे जख्म मिले हैं। ये चोटें संभवतः किसी अन्य तेंदुए के साथ हुई लड़ाई के दौरान लगी होंगी। उन्होंने बताया कि घाव कई दिन पुराने लग रहे हैं। मौत के असली कारण का पता लगाने के लिए (Leopard Death in Wildlife Sanctuary) पोस्टमार्टम कराया जा रहा है।
पहले भी हो चुकी हैं मौतें
इंद्रावती टाइगर रिजर्व और आसपास के अभयारण्यों में इससे पहले भी वन्यजीवों की संदिग्ध मौतें हो चुकी हैं। 2023 में फरसेगढ़ इलाके में एक तेंदुए का शव मिला था, जबकि 2024 की शुरुआत में उसूर क्षेत्र में एक भालू की मौत हुई थी, जिसे शिकारी द्वारा लगाए गए फंदे से जोड़ा गया। (Leopard Death in Wildlife Sanctuary) बाघ की खाल के साथ भी कई बार शिकारी पकड़े जा चुके हैं।
यह घटना एक बार फिर इस बात को रेखांकित करती है कि अगर वन्यजीव संरक्षण और सुरक्षा पर गंभीरता से काम नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में इन प्रजातियों का अस्तित्व संकट में पड़ सकता है।