सीजी भास्कर 18 जनवरी Lingiyadih Protest Chhattisgarh : बिलासपुर के लिंगियाडीह इलाके में चल रहा “लिंगियाडीह बचाओ आंदोलन” आज अपने 56वें दिन में पहुंच गया है। कड़ाके की ठंड, खुले आसमान के नीचे रातें और लगातार दबाव के बावजूद आंदोलनकारियों का हौसला कमजोर नहीं पड़ा है, बल्कि यह संघर्ष हर गुजरते दिन के साथ और तेज होता जा रहा है।
धरना स्थल पर उस समय माहौल और गरमा गया जब बड़ी संख्या में राजनीतिक और सामाजिक प्रतिनिधि वहां पहुंचे। मंच से सवाल उठा—“क्या चुनाव खत्म होते ही जनता की कोई अहमियत नहीं रह जाती?” यह सवाल (Public Land Eviction Issue) अब केवल लिंगियाडीह तक सीमित नहीं रहा।
जिला कांग्रेस ग्रामीण अध्यक्ष महेंद्र गंगोत्री ने सरकार की नीतियों पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि गरीबों को बेघर कर विकास का जश्न मनाने की सोच असंवेदनशील है। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा, “गार्डन में फूल खिलेंगे या गरीबों की बददुआएं, इसका जवाब सत्ता को देना होगा।”
धरना स्थल पर मौजूद महिलाओं और बेटियों ने सरकार पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि एक ओर ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ की बातें होती हैं, वहीं दूसरी ओर सैकड़ों महिलाएं अपने घर बचाने के लिए सर्द रातें सड़कों पर बिताने को मजबूर हैं। यह स्थिति (Women Housing Rights) पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
आंदोलनकारियों का आरोप है कि पहले सड़क और बुनियादी ढांचा बनाया गया, अब उन्हीं गरीब बस्तियों को हटाकर वहां पिकनिक स्पॉट और गार्डन विकसित करने की योजना है। सवाल यह है कि क्या पेट भरने वाले घरों को तोड़कर मनोरंजन स्थल बनाना न्याय कहलाएगा?
सर्व आदिवासी प्रदेश युवा वर्ग अध्यक्ष सुभाष सिंह परतें ने इसे केवल अतिक्रमण नहीं, बल्कि अस्तित्व की लड़ाई बताया। उन्होंने कहा कि यहां सिर्फ मकान नहीं टूट रहे, बल्कि आदिवासी और सर्व समाज की पहचान पर सीधा प्रहार हो रहा है। उन्होंने सभी वर्गों से एकजुट होकर संघर्ष तेज करने का आह्वान किया।
धरना स्थल से उठती आवाजें अब सत्ता के गलियारों तक पहुंचने लगी हैं। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी कि जिस जनता ने सरकार को सत्ता सौंपी है, वही जनता जरूरत पड़ने पर उसे वापस लेने का माद्दा भी रखती है। आने वाले दिनों में यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।




