सीजी भास्कर, 04 मई । शहर से लेकर गांव तक इन दिनों रसोई गैस को लेकर अलग तरह की चर्चा सुनाई दे रही है। कहीं सिलेंडर की उपलब्धता पर बात हो रही है तो कहीं बढ़ते अंतराल को लेकर लोग चिंता जता रहे हैं। बाजार में भी इसका असर महसूस किया जा रहा है और कारोबारी वर्ग इसे लेकर सवाल उठा रहा है।
घरों में भी लोग गैस के इस्तेमाल को लेकर थोड़ा सतर्क नजर (LPG Consumption) आ रहे हैं। कई जगहों पर सिलेंडर भरवाने में देरी की बातें सामने आ रही हैं, जिससे यह साफ है कि स्थिति सामान्य नहीं है और इसके पीछे कोई बड़ा कारण जुड़ा हुआ है।
अप्रैल में खपत में तेज गिरावट (LPG Consumption)
ताजा आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल महीने में एलपीजी की खपत में करीब 16 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इस दौरान कुल खपत लगभग 2.2 मिलियन टन रही, जो पिछले साल के मुकाबले काफी कम है। यह गिरावट घरेलू और व्यावसायिक दोनों क्षेत्रों में देखने को मिली है।
सप्लाई पर पड़ा असर
बताया जा रहा है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। भारत अपनी जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऐसे में बाहरी परिस्थितियों का सीधा असर यहां दिखा है। महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग प्रभावित होने से आपूर्ति में रुकावट आई, जिससे स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो गई।
महीने दर महीने भी गिरावट
सिर्फ सालाना ही नहीं, बल्कि महीने दर महीने आधार पर भी खपत में कमी (LPG Consumption) आई है। मार्च के मुकाबले अप्रैल में खपत और घट गई, जिससे यह संकेत मिलता है कि मांग और सप्लाई दोनों दबाव में हैं।
सरकार ने बदली रणनीति
स्थिति को संभालने के लिए सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी है। इसके चलते होटल, रेस्टोरेंट और उद्योगों के लिए गैस सप्लाई में कटौती की गई है। साथ ही घरों में सिलेंडर रिफिल के बीच का अंतर भी बढ़ाया गया है ताकि उपलब्ध स्टॉक को संतुलित रखा जा सके।
पहले लगातार बढ़ रही थी मांग
पिछले कुछ सालों में एलपीजी की मांग लगातार बढ़ती रही थी। स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने की नीतियों के कारण इसका उपयोग तेजी (LPG Consumption) से बढ़ा था। लेकिन मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों ने इस रफ्तार को धीमा कर दिया है और अब स्थिति पर नजर बनाए रखी जा रही है।
अन्य ईंधनों पर भी असर
इस दौरान अन्य ईंधनों की मांग पर भी असर देखा गया है। हवाई सेवाओं पर असर पड़ने से विमान ईंधन की खपत में भी कमी आई है। फिलहाल स्थिति को सामान्य करने के लिए प्रयास जारी हैं और आने वाले समय में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।


