सीजी भास्कर, 03 मई : छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले से धोखाधड़ी और विश्वासघात का एक ऐसा मामला (LPG Gas Theft Case Mahasamund) सामने आया है, जिसने जिला प्रशासन और पुलिस महकमे को चौकन्ना कर दिया है। ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स कंपनी के मालिक और डायरेक्टर पर प्रशासन की अमानत में खयानत करते हुए लगभग 1.5 करोड़ रुपये की गैस चोरी करने का संगीन आरोप लगा है। इस पूरे मामले ने सिस्टम की कार्यप्रणाली और निजी कंपनियों की नीयत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जब रक्षक ही बन गया भक्षक
मामले की शुरुआत दिसंबर 2025 में हुई थी, जब महासमुंद की सिंघोड़ा थाना पुलिस ने अवैध परिवहन के संदेह में 6 एलपीजी गैस कैप्सूल वाहनों को जब्त किया था। इन गाड़ियों में करीब 90 मीट्रिक टन एलपीजी लोड थी। चूंकि गाड़ियां ज्वलनशील पदार्थ से भरी थीं, इसलिए सुरक्षा कारणों से उन्हें लंबे समय तक थाने में रखना जोखिम भरा था। पुलिस की चिंता पर संज्ञान लेते हुए कलेक्टर ने इन ट्रकों को किसी सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करने का आदेश दिया।
यही वह मोड़ था जहाँ से इस साजिश (LPG Gas Theft Case Mahasamund) की नींव पड़ी। प्रशासन ने भरोसे के साथ ये गाड़ियां रायपुर के अभनपुर स्थित ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स के संचालक संतोष सिंह ठाकुर को सुपुर्द कर दीं। पुलिस और खाद्य विभाग को लगा कि वहां गैस सुरक्षित रहेगी, लेकिन कंपनी के मालिक ने इसे एक अवसर के रूप में देखा।
साजिश और 200 किलोमीटर का ‘रहस्यमयी’ सफर
30 मार्च 2026 को खाद्य विभाग की टीम की मौजूदगी में 6 कैप्सूल ट्रक संतोष ठाकुर को सौंपे गए। सिंघोड़ा से अभनपुर के ग्राम उरला स्थित प्लांट की दूरी लगभग 200 किलोमीटर है। नियमों के मुताबिक, हैंडओवर के समय वजन कराया जाना अनिवार्य था, लेकिन इसी चूक का फायदा आरोपियों ने उठाया। रास्ते में 15 से ज्यादा धर्मकांटे होने के बावजूद गाड़ियों का वजन नहीं कराया गया।
जांच में खुलासा हुआ कि इस घोटाले (LPG Gas Theft Case Mahasamund) को अंजाम देने के लिए ट्रकों को प्लांट से 200 मीटर दूर खड़ा कर दिया गया और 8 दिनों तक वजन टालने का नाटक चलता रहा। इस दौरान एक-एक कर कैप्सूल ट्रकों को प्लांट के भीतर ले जाकर खाली किया गया।
लीकेज का बहाना और एक्सपर्ट की रिपोर्ट
जब पूरा माल ठिकाने लगा दिया गया, तब कंपनी मालिक ने जिला प्रशासन को सूचित किया कि एलपीजी गैस लीक हो गई है और अब कैप्सूल खाली हैं। हालांकि, जब राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों की टीम ने जांच की, तो चोरी की पोल खुल गई। एक्सपर्ट्स ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि बिना किसी बड़ी दुर्घटना या आगजनी के, तीन महीने में एक कैप्सूल से 20 टन गैस स्वतः लीक होना वैज्ञानिक रूप से असंभव है। इस तकनीकी जांच ने चोरी (LPG Gas Theft Case Mahasamund) की सच्चाई को उजागर कर दिया।
कागजों में पकड़ी गई चोरी
पुलिस और खाद्य विभाग ने जब कंपनी के दस्तावेजों को खंगाला, तो आंकड़े हैरान करने वाले थे। रिकॉर्ड के अनुसार, अप्रैल महीने में ठाकुर पेट्रोकेमिकल कंपनी ने केवल 47 टन एलपीजी गैस की आधिकारिक खरीद की थी। लेकिन, जब बिक्री का मिलान किया गया, तो कंपनी ने 107 टन गैस बेची थी।
यह अतिरिक्त 60 टन गैस वही थी जो जब्त किए गए कैप्सूलों से चोरी की गई थी। जांच दल को कच्चे रजिस्टर भी मिले हैं, जिनमें बिना पक्के बिल के गैस बेचने का विवरण दर्ज था। इस कांड (LPG Gas Theft Case Mahasamund) के तहत आरोपियों ने गैस को घरेलू और कमर्शियल सिलेंडरों में भरकर ऊंचे दामों पर बेच दिया।
पुलिसिया कार्रवाई और आरोपियों की तलाश
महासमुंद पुलिस ने इस बड़े घोटाले की पुष्टि होने के बाद ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स के मालिक संतोष सिंह ठाकुर, डायरेक्टर साकिन ठाकुर और अन्य सहयोगियों के खिलाफ आईपीसी की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की है। पुलिस ने कंपनी के एक कर्मचारी को हिरासत में लिया है, जिससे पूछताछ जारी है। हालांकि, मुख्य आरोपी संतोष सिंह और साकिन ठाकुर फिलहाल फरार बताए जा रहे हैं।
सिंघोड़ा थाना प्रभारी के अनुसार, यह एक सुनियोजित अपराध (LPG Gas Theft Case Mahasamund) है। प्रशासन की ओर से हुई शुरुआती लापरवाही, जिसमें बिना वजन के गाड़ियां सौंपी गईं, उसकी भी समीक्षा की जा रही है। पुलिस की टीमें आरोपियों की तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं।
प्रशासन के लिए सबक
इस घटना ने यह साबित कर दिया है कि अमानत के तौर पर सौंपी गई संपत्तियों की निगरानी के लिए कड़े प्रोटोकॉल की आवश्यकता है। अगर हैंडओवर के समय और रास्ते में वजन की प्रक्रिया पारदर्शी होती, तो शायद इस फर्जीवाड़े (LPG Gas Theft Case Mahasamund) को रोका जा सकता था। फिलहाल, जिले में इस डेढ़ करोड़ रुपये के घोटाले की चर्चा जोरों पर है और लोग फरार मालिकों की गिरफ्तारी का इंतजार कर रहे हैं।
अंततः, यह मामला न केवल वित्तीय धोखाधड़ी का है, बल्कि ज्वलनशील गैस के अवैध रिफिलिंग और परिवहन के कारण आम जनता की सुरक्षा के साथ किए गए खिलवाड़ का भी है। पुलिस को संदेह है कि इस नेटवर्क (LPG Gas Theft Case Mahasamund) के तार अंतर्राज्यीय गैस माफियाओं से भी जुड़े हो सकते हैं।


