सीजी भास्कर, 03 मई : सुदूर वनांचल क्षेत्रों में शासन (Sushasan Tihar Sukma News) की योजनाओं की पहुंच और प्रशासनिक संवेदनशीलता का एक अनूठा उदाहरण सुकमा जिले के अंतिम छोर पर स्थित ग्राम पुसगुड़ा में देखने को मिला। यहाँ ‘सुशासन तिहार’ के तहत आयोजित जनचौपाल में कलेक्टर अमित कुमार ने किसी आलीशान मंच के बजाय महुआ पेड़ की छांव में ग्रामीणों के साथ जमीन पर बैठकर उनकी समस्याएं सुनीं। इस पहल ने प्रशासन और जनता के बीच के फासले को कम करने का काम किया है।
जमीन पर बैठकर संवाद
करीब 106 की आबादी वाले इस छोटे से गांव में कलेक्टर का जमीन पर बैठकर संवाद करना चर्चा का विषय बना हुआ है। ‘नियद नेल्लानार योजना 2.0’, ‘बस्तर मुन्ने’ और ‘सुशासन तिहार’ के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में ग्रामीणों ने बेझिझक अपनी बातें रखीं। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि प्रशासन का उद्देश्य केवल आदेश जारी करना नहीं, बल्कि अंतिम व्यक्ति तक पहुंचकर उसकी समस्याओं का समाधान करना है। इस संवाद (Sushasan Tihar Sukma News) के दौरान मौके पर ही कई समस्याओं का निराकरण भी किया गया।

शिकायत मिलते ही सुधरा हैंडपंप
जनचौपाल की सफलता तब और बढ़ गई जब खराब हैंडपंप की शिकायत मिलते ही उसे तत्काल ठीक करा दिया गया। इसके साथ ही कलेक्टर ने गांव में सामुदायिक कार्यों के लिए 20 लाख रुपये की राशि स्वीकृत करने की घोषणा की। इस निर्णय (Sushasan Tihar Sukma News) से गांव में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार होगा, जिससे ग्रामीणों का प्रशासन पर विश्वास और गहरा हुआ है।

सड़क और वाहन की सौगात
गांव को मुख्य मार्ग से जोड़ने के लिए पक्की सड़क निर्माण का प्रस्ताव तत्काल मंगाया गया है। महिला सशक्तिकरण की दिशा में कदम उठाते हुए गांव को ‘तूफान’ सवारी वाहन देने की घोषणा की गई। इस योजना के अलावा स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए गर्भवती महिलाओं की समय पर पहचान और उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
बदल रही है वनांचल की तस्वीर
पुसगुड़ा के ग्रामीणों ने बताया कि अब उनके गांव में बिजली पहुंच चुकी है और जल जीवन मिशन के माध्यम से घर-घर नल से पानी की आपूर्ति हो रही है। श्रम कार्ड बनने से लोगों को शासकीय योजनाओं का सीधा लाभ मिल रहा है। इस बदलाव की सराहना करते हुए ग्रामीणों ने इसे सुशासन की असली तस्वीर बताया।
प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी
इस महत्वपूर्ण आयोजन के दौरान एसडीएम सुभाष शुक्ला, जनपद सीईओ सुमित ध्रुव और एडिशनल एसपी मनोज तिर्की सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि हर गांव तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाना प्रशासन की प्राथमिकता है और इसी दिशा में लगातार कार्य किए जा रहे हैं।
प्रशासन की इस सीधी पहुंच ने यह साबित कर दिया है कि अगर मंशा साफ हो, तो घने जंगलों के बीच बसे गांव भी विकास की मुख्यधारा से जुड़ सकते हैं। यह कार्यक्रम अन्य क्षेत्रों के लिए भी एक प्रेरणादायक उदाहरण बन गया है।


