सीजी भास्कर, 18 दिसंबर | Manendragarh Bear Capture News : मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के मनेंद्रगढ़ शहरी इलाके में बीते तीन महीनों से लोगों की दिनचर्या डर के बीच गुजर रही थी। रात होते ही सड़कों पर सन्नाटा छा जाता था। वजह—लगातार रिहायशी इलाकों में घूमते भालू। आखिरकार वन विभाग की रणनीति रंग लाई और तीनों भालू सुरक्षित तरीके से पकड़ लिए गए।
पिंजरे में कैद हुआ संकट
वन विभाग ने शहर के अलग-अलग संवेदनशील इलाकों में विशेष पिंजरे लगाए थे। 16 दिसंबर की रात एक के बाद एक दो शावक पिंजरे में फंस गए। वहीं, मादा भालू को सुबह ट्रेंक्यूलाइज कर काबू में किया गया। पूरे ऑपरेशन के दौरान सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखा गया।
रेस्क्यू में विशेषज्ञों की अहम भूमिका
अभियान को सफल बनाने के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम बुलाई गई थी। कानन पेंडारी से डॉ. चंदन और डॉ. अजीत पांडे मौके पर मौजूद रहे। साथ ही एलिफेंट रेस्क्यू सेंटर रमकोला की टीम ने भी तकनीकी सहयोग दिया। हसदेव इन होटल के पास लगे जाल में दोनों शावक देर रात फंसे पाए गए।
जंगल की ओर सुरक्षित रवानगी
पकड़े गए तीनों भालुओं को किसी तरह का नुकसान न पहुंचे, इसका पूरा ध्यान रखा गया। वन विभाग की टीम उन्हें विशेष वाहनों से दूरस्थ घने जंगल में छोड़ने के लिए रवाना हुई। इस खबर के फैलते ही शहर में राहत की सांस ली गई।
विरोध से सम्मान तक का सफर
भालुओं की मौजूदगी को लेकर कुछ दिन पहले तक वन विभाग के अधिकारियों के खिलाफ नाराजगी खुलकर सामने आ रही थी। राजनीतिक दलों और स्थानीय लोगों ने प्रदर्शन भी किया था। लेकिन जैसे ही समस्या का समाधान हुआ, वही लोग रेंजर रामसागर कुर्रे के सम्मान में आगे आए।
मिठाई, माला और राहत का जश्न
तीनों भालुओं के पकड़े जाने के बाद माहौल पूरी तरह बदल गया। स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने रेंजर रामसागर कुर्रे को फूल-मालाएं पहनाईं, मिठाई खिलाई और अभियान की सराहना की। यह दृश्य प्रशासन और आमजन के बीच भरोसे की वापसी का प्रतीक बन गया।
शहर ने चैन की नींद ली
नगरवासियों का कहना है कि अब बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं में भय कम हुआ है। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि आगे भी वन्यजीवों और शहरी जीवन के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए ऐसे ही सतर्क कदम उठाए जाएंगे।





