सीजी भास्कर, 26 अगस्त : विपक्ष के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जस्टिस बी. सुदर्शन रेड्डी के खिलाफ छत्तीसगढ़ के माओवादी हिंसा के पीड़ितों ने मोर्चा खोल दिया है। माओवादी हिंसा के केंद्र रहे बस्तर के पीड़ितों ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी पार्टियों के सांसदों को पत्र लिखकर ‘एक माओवाद समर्थक’ को उपराष्ट्रपति पद पर बिठाने की कोशिश पर सवाल उठाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से सलवा जुडूम प्रतिबंधित होने के बाद माओवादी हिंसा ने बस्तर में कोहराम मचाया और सैकड़ों लोगों की मौत हुई। (Maoist Violence Victims)
उत्तर बस्तर के कांकेर जिले के चारगांव के उप-सरपंच रहे 56 वर्षीय सियाराम रामटेके ने पत्र में लिखा कि सलवा जुडूम आदिवासियों का अपना आंदोलन था, जो माओवादियों के आतंक को खत्म करना चाहते थे। लेकिन सुप्रीम कोर्ट द्वारा सलवा जुडूम को प्रतिबंधित करने के बाद माओवादियों ने आदिवासियों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। रामटेके के अनुसार, उन्हें भी माओवादियों ने घेरकर पैर और पेट में गोली मारी थी और उन्हें मर हुआ समझकर छोड़ दिया गया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि बस्तर की जनता को मरने के लिए छोड़ देने वाले जस्टिस सुदर्शन रेड्डी का समर्थन न करें। (Maoist Violence Victims)
सुकमा के भीमापुरम निवासी अशोक गन्दामी ने अपनी भतीजी मड़कम सुक्की की दर्दनाक कहानी साझा की और इसके लिए जस्टिस सुदर्शन रेड्डी के सलवा जुडूम पर प्रतिबंध को जिम्मेदार ठहराया। सुक्की के पिता माओवादी हमले में मारे गए और बाद में आईईडी के कारण सुक्की का एक पैर उड़ गया। गन्दामी ने कांग्रेस और उसके वरिष्ठ नेताओं को ऐसे व्यक्ति को उम्मीदवार बनाने पर आड़े हाथों लिया। इस पूरे मामले ने राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर तीखी बहस को जन्म दिया है। (Maoist Violence Victims)