सीजी भास्कर, 23 जनवरी | बस्तर ब्लॉक के पिपलावंड क्षेत्र में संचालित खदानों को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश आखिरकार खुलकर सामने आ गया। 14 खदानों की लगातार ब्लास्टिंग से प्रभावित ग्रामीणों ने लोक सुनवाई के दौरान विरोध दर्ज कराते हुए प्रशासनिक अधिकारियों का घेराव कर दिया। (Mining Protest Bastar) को लेकर ग्रामीणों ने साफ शब्दों में कहा कि अब सब्र की सीमा टूट चुकी है।
घरों में दरार, खेतों में नुकसान
ग्रामीणों का आरोप है कि रोज़ाना हो रही ब्लास्टिंग से मकानों की दीवारों और छतों में दरारें आ चुकी हैं। कई घरों में छतों के प्लास्टर गिर रहे हैं, जबकि खेती योग्य जमीन पर पत्थरों की परत जमने से फसल प्रभावित हो रही है। (Mining Impact Villages) के चलते जीवन-यापन कठिन होता जा रहा है।
पेयजल स्रोत भी हुए प्रभावित
लोक सुनवाई में ग्रामीणों ने यह भी बताया कि खनन गतिविधियों के कारण कुएँ और हैंडपंप का पानी दूषित हो गया है। कई जगहों पर पानी का स्तर गिरा है, तो कहीं पानी पीने लायक नहीं बचा। (Water Contamination Issue) को लेकर महिलाओं और बुजुर्गों में खास चिंता देखी गई।
अधिकारियों पर अनसुनी का आरोप
लोक सुनवाई में मौजूद अपर कलेक्टर, एसडीएम, तहसीलदार और खनिज विभाग के अधिकारियों से जब ग्रामीणों ने जवाब मांगा, तो उन्हें संतोषजनक आश्वासन नहीं मिला। इसी बात से नाराज ग्रामीणों ने अधिकारियों का घेराव कर लिया। (Public Hearing Clash) की स्थिति बनने पर मौके पर मौजूद पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा।
खसरा विवाद ने बढ़ाया तनाव
ग्रामीणों ने खनन नियमों के उल्लंघन और प्रशासन-उद्योगपतियों की मिलीभगत का आरोप भी लगाया। उनका कहना है कि जिन खसरा नंबरों पर खदानें संचालित की जा रही हैं, उन्हीं जमीनों पर उनके घर और कृषि भूमि दर्ज हैं। (Illegal Mining Allegation) को लेकर प्रशासन और ग्रामीणों के दावे आमने-सामने नजर आए।
समाधान नहीं तो आंदोलन तय
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि खदानों से हो रहे नुकसान का स्थायी समाधान नहीं निकाला गया, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करेंगे। फिलहाल पिपलावंड क्षेत्र में खनन को लेकर माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है और प्रशासन पर दबाव बढ़ता जा रहा है।


