सीजी भास्कर 15 फरवरी कोरर थाना क्षेत्र में नाबालिग के लापता होने की सूचना मिलते ही (Minor Abduction Case Bhanupratappur) को गंभीरता से लिया गया। परिजन की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने बिना समय गंवाए प्राथमिकी दर्ज की, और संभावित ठिकानों पर दबिश की रणनीति बनाई। शुरुआती जांच में सामने आया कि लड़की को बहला-फुसलाकर घर से दूर ले जाया गया था।
विशेष टीम बनाकर शुरू हुई तलाश
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए (Fast Police Action Chhattisgarh) के तहत एक विशेष टीम गठित की गई। टीम ने मोबाइल लोकेशन, स्थानीय सूत्रों और परिवहन मार्गों की जानकारी के आधार पर मूवमेंट ट्रैक किया। अलग-अलग दिशाओं में टीमों को रवाना कर त्वरित खोज अभियान चलाया गया, ताकि समय रहते अपहृता को सुरक्षित निकाला जा सके।
धमतरी में मिली बच्ची, खतरे से बाहर
लगातार दबिश और सूचना तंत्र के जरिए (Minor Girl Recovered Safely) की पुष्टि धमतरी क्षेत्र में हुई। मौके पर पहुंची टीम ने नाबालिग को सकुशल बरामद किया। प्राथमिक जांच में बच्ची की हालत सामान्य बताई गई, जिसके बाद आवश्यक कानूनी प्रक्रिया और काउंसलिंग की व्यवस्था की गई, ताकि मानसिक रूप से उसे सुरक्षित माहौल मिल सके।
अंबिकापुर से पकड़ा गया आरोपी
तकनीकी और मानवीय सूत्रों के सहारे (Accused Arrested Within 48 Hours) की कार्रवाई को अंजाम दिया गया। आरोपी के अंबिकापुर में छिपे होने की जानकारी मिलते ही टीम ने घेराबंदी कर उसे हिरासत में लिया। पूछताछ में आरोपी ने वारदात में अपनी भूमिका स्वीकार की, जिसके बाद उसे न्यायालय में पेश कर न्यायिक रिमांड पर भेजा गया।
समय पर सूचना से टली बड़ी अनहोनी
यह मामला (Child Safety Awareness) की अहमियत को रेखांकित करता है। परिजनों की त्वरित रिपोर्टिंग और पुलिस की तेज कार्रवाई ने संभावित खतरे को टाल दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि नाबालिगों से जुड़े मामलों में शुरुआती 24–48 घंटे बेहद निर्णायक होते हैं, इसलिए किसी भी संदिग्ध स्थिति में देर न करें।





