सीजी भास्कर, 17 जनवरी। राजा मोरध्वज की त्याग, धर्म और सत्यनिष्ठा की गौरवगाथा को समर्पित मोरध्वज आरंग महोत्सव–2026 (MorDhwaj Arang Mahotsav) का समापन ऐतिहासिक गरिमा, सांस्कृतिक चेतना और जनआस्था के विराट संगम के साथ सम्पन्न हुआ। यह आयोजन न केवल परंपरा और संस्कृति का उत्सव बना, बल्कि क्षेत्रीय विकास के नए संकल्पों का साक्षी भी रहा। इस अवसर पर उपस्थित विशाल जनसमूह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राजा मोरध्वज का जीवन छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक आत्मा का प्रतीक है, जो आज भी समाज को सत्य, कर्तव्य और त्याग के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। यह महोत्सव हमारी पहचान, विरासत और मूल्यबोध को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का सशक्त माध्यम है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आरंग की यह पुण्यभूमि त्रेता युग में प्रभु राम के चरण-स्पर्श से तथा द्वापर युग में भगवान कृष्ण की स्मृतियों से अनुप्राणित रही है। उन्होंने बागेश्वर बाबा में विधिवत जलाभिषेक एवं पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति और सतत विकास की कामना की। उन्होंने कहा कि (मोरध्वज आरंग महोत्सव 2026) जैसे आयोजन छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक चेतना को जीवंत रखते हैं और सामाजिक समरसता को मजबूत करते हैं।
समापन समारोह (MorDhwaj Arang Mahotsav) के दौरान मुख्यमंत्री ने क्षेत्र के सर्वांगीण विकास को गति देने वाली कई महत्वपूर्ण (MorDhwaj Arang Mahotsav) घोषणाएँ कीं। उन्होंने समोदा उप तहसील को पूर्ण तहसील का दर्जा देने और वहाँ पूर्णकालिक तहसीलदार की पदस्थापना की घोषणा की। इसके साथ ही मोरध्वज महोत्सव के लिए दिए जाने वाले शासकीय अनुदान को 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये करने की घोषणा की गई। मुख्यमंत्री ने क्षेत्र में प्रस्तावित खेल परिसर सहित अन्य अधोसंरचना विकास कार्यों को शीघ्र पूर्ण कराने का आश्वासन देते हुए कहा कि विकास और संस्कृति साथ-साथ चलें, यही सरकार की प्राथमिकता है। इन घोषणाओं ने (मोरध्वज आरंग महोत्सव 2026) को विकास की दृष्टि से भी यादगार बना दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार “मोदी की गारंटी” के अनुरूप जनहित को सर्वोपरि रखते हुए निरंतर कार्य कर रही है। शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, रोजगार और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण को विकास नीति का आधार बताते हुए उन्होंने कहा कि संवेदनशील शासन, त्वरित निर्णय और जनता से सीधा संवाद ही सुशासन की पहचान है। उन्होंने यह भी कहा कि (मोरध्वज आरंग महोत्सव 2026) जैसे आयोजनों के माध्यम से सरकार स्थानीय संस्कृति को राष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।
समारोह के दौरान सैंड आर्टिस्ट हेमचंद साहू को रेत से भगवान कृष्ण, भगवान राम और भगवान बागेश्वरनाथ की दिव्य आकृतियाँ उकेरने के लिए सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री ने कलाकार की सृजनशीलता, साधना और समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी कला हमारी आस्था और सांस्कृतिक विरासत को सशक्त बनाती है तथा छत्तीसगढ़ की पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर गौरव प्रदान करती है। उन्होंने कलाकार को भविष्य में भी इसी प्रकार अपनी कला के माध्यम से प्रदेश का नाम रोशन करने के लिए शुभकामनाएँ दीं। यह क्षण (मोरध्वज आरंग महोत्सव 2026) के सांस्कृतिक वैभव का प्रतीक बन गया।
समापन अवसर पर जनप्रतिनिधियों, साधु-संतों, मातृशक्ति, युवाओं और बड़ी संख्या में उपस्थित नागरिकों की सहभागिता ने समारोह को ऐतिहासिक बना दिया। आयोजन समिति को सफल और भव्य आयोजन के लिए बधाई देते हुए मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को मोरध्वज महोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएँ दीं और कहा कि यह आयोजन आने वाले वर्षों में और भी व्यापक स्वरूप लेगा। जनआस्था, संस्कृति और विकास के त्रिवेणी संगम के रूप में (मोरध्वज आरंग महोत्सव 2026) लंबे समय तक स्मरणीय रहेगा।
समारोह में उप मुख्यमंत्री अरुण साव, स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल, गुरु बालकदास साहेब, सांसद विजय बघेल, बृजमोहन अग्रवाल, विधायक इंद्रकुमार साहू, मोतीलाल साहू, रोहित साहू सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।




