सीजी भास्कर, 14 अप्रैल। छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले से एक बेहद हृदयविदारक और हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहाँ बड़े राजपुर तहसील के ग्राम पंचायत किबड़ा में मात्र चार घंटे के अंतराल में दो सगे भाई-बहनों की संदेहास्पद परिस्थितियों में मौत हो गई। इस रहस्यमयी मौत (Mysterious Deaths of Siblings) की घटना ने न केवल गाँव में मातम पसर दिया है, बल्कि चिकित्सा विभाग की घोर लापरवाही और ग्रामीणों में गहरे पैठे अंधविश्वास की परतें भी खोल दी हैं।
मामूली लक्षण, भयावह परिणाम
जानकारी के अनुसार, मृतक कलेश्वरी शोरी (17) और उसका भाई चैतन शोरी (14) अपनी छोटी बहन कुमारी चिंता शोरी (12) के साथ रविवार की सुबह घर पर ही थे। सुबह 9 से 10 बजे के बीच अचानक तीनों भाई-बहनों को पेट में तेज़ दर्द शुरू हुआ। दर्द के साथ ही उन्हें 3-4 बार दस्त भी हुए। परिजनों ने शुरुआत में इसे मामूली बीमारी समझकर स्थानीय स्तर पर इलाज कराने का प्रयास किया, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। स्थानीय उप स्वास्थ्य केंद्र के स्वास्थ्य कर्मियों से इलाज के बावजूद जब पेट दर्द कम नहीं हुआ, तो परिजनों ने उन्हें जिला अस्पताल कोंडागांव ले जाने का फैसला किया।
रास्ते में बड़ी बहन ने तोड़ा दम
परिजन दोनों को जिला अस्पताल ले जाने के लिए बोलेरो वाहन बुला ही रहे थे कि छोटी बहन कुमारी चिंता अचानक ठीक हो गई। इसलिए उसे घर पर ही छोड़ दिया गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए परिजनों ने रास्ते में ही पड़ने वाले ग्राम बड़बतर के प्राथमिक चिकित्सा केंद्र में बड़ी बहन कलेश्वरी को दिखाया, जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। कलेश्वरी की लाश को दूसरे वाहन से घर भेज दिया गया, जबकि भाई चैतन्य को किसी तरह जिला अस्पताल कोंडागांव पहुंचाया गया। लेकिन नियति को कुछ और ही मंज़ूर था। जिला अस्पताल पहुँचने के कुछ ही घंटों बाद चैतन्य ने भी दम तोड़ दिया।
चिकित्सा विभाग की घोर लापरवाही और अंधविश्वास का साया
महज़ 4 घंटे के भीतर दो युवा भाई-बहनों की आकस्मिक मौत ने पूरे गांव को दहशत में डाल दिया है। इस रहस्यमयी मौत (Mysterious Deaths of Siblings) के पीछे कई तरह की चर्चाएं हैं। सबसे गंभीर बात यह है कि घटना को इतना समय बीतने के बाद भी चिकित्सा विभाग की कोई उच्च स्तरीय टीम गाँव नहीं पहुँची है। स्थानीय नर्स द्वारा सामान्य जाँच-पड़ताल कर ली गई है, लेकिन अभी तक मृतकों का पोस्टमार्टम भी नहीं कराया गया है, जो मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए अनिवार्य है।
ग्रामीणों में देवी प्रकोप का डर
गांव में दहशत और अंधविश्वास का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों इस अचानक हुई घटना को कोई सामान्य बीमारी मानने को तैयार नहीं हैं। उनका मानना है कि यह सब ‘देवी प्रकोप’ के कारण हुआ है। ग्रामीणों ने गाँव में ‘देवी जात्रा’ और ‘पूजा-पाठ’ करने की तैयारी भी शुरू कर दी है।
इस पूरे मामले पर जब खंड चिकित्सा अधिकारी (BMO) विश्रामपुरी-बड़े राजपुर अनुराग भारती से संपर्क किया गया, तो उन्होंने कहा कि “मुझे घटना की जानकारी नहीं है। यदि यह घटना हुई है, तो यह संभवतः फूड प्वाइजनिंग (Food Poisoning – Mysterious Deaths of Siblings) का मामला हो सकता है।” उनका यह बयान चिकित्सा विभाग की उदासीनता को उजागर करता है, जब एक साथ दो बच्चों की मौत हो जाए और अधिकारी को इसकी जानकारी ही न हो।
कैंसर से पिता को पहले ही खो चुका है परिवार
पीड़ित परिवार की दास्तान और भी मार्मिक है। मृतक भाई-बहनों के पिता ढोल राम शोरी की कैंसर के चलते 2 साल पहले ही मौत हो चुकी है। अब घर में केवल माँ नंगाय बाई और छोटी बेटी कुमारी चिंता ही बचे हैं, जिनके सिर से आंचल का साया महज़ 4 घंटे में उठ गया। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की इस अनदेखी पर सवाल उठना लाज़मी है।


