Nalanda Part-2 Controversy: रायपुर में प्रस्तावित नालंदा परिसर पार्ट-2 के निर्माण को लेकर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस ने राज्य सरकार पर सीधे सवाल खड़े करते हुए 10 बिंदुओं पर सार्वजनिक जवाब की मांग की है। कांग्रेस नेता श्रीकुमार मेनन का कहना है कि भूमि पूजन से पहले सरकार, पूर्व सरकार और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों को रायपुर की जनता के सामने स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
नियमों के नाम पर गुमराह करने का आरोप
कांग्रेस का आरोप है कि स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत बने यूथ हब को पिछले तीन-चार वर्षों से नियमों के खिलाफ बताकर जनता को भ्रमित किया गया। जबकि विधानसभा में नगरीय निकाय मंत्री के जवाब से यह स्पष्ट हो चुका है कि यूथ हब नियमानुसार बना था। इसके बावजूद उसे अवैध बताकर तोड़ना जनता के भरोसे के साथ खिलवाड़ है।
सैकड़ों लोगों की रोज़ी पर असर
पार्टी का कहना है कि 7 से 8 करोड़ रुपये की लागत से बने यूथ हब को ध्वस्त किए जाने से करीब 300 से 400 लोगों का प्रत्यक्ष रोजगार खत्म हो गया। कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि क्या संबंधित मंत्री या क्षेत्रीय विधायक इन प्रभावित लोगों को दोबारा रोजगार उपलब्ध कराएंगे, या उनकी स्थिति जानने का कोई प्रयास किया गया है।
नुकसान की भरपाई कौन करेगा
कांग्रेस ने खर्च की गई सार्वजनिक राशि की जवाबदेही तय करने की मांग भी की है। सवाल यह उठाया गया है कि करोड़ों रुपये के निर्माण को तोड़ने की अनुमति किस आधार पर दी गई और इसकी जिम्मेदारी स्मार्ट सिटी प्रशासन, तत्कालीन जनप्रतिनिधियों या किसी अन्य पर तय होगी या नहीं।
तय जगह होते हुए नया स्थान क्यों
नालंदा पार्ट-2 के लिए चुने गए स्थल पर भी कांग्रेस ने आपत्ति दर्ज कराई है। पार्टी का कहना है कि जब नालंदा पार्ट-1 के पास पहले से खाली और चिन्हित जगह उपलब्ध थी, तो जीई रोड जैसे व्यस्त मार्ग के किनारे निर्माण का निर्णय क्यों लिया गया। इससे ट्रैफिक दबाव और सुरक्षा से जुड़े खतरे बढ़ सकते हैं।
शहर की व्यवस्था पर सवाल
कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि प्रमुख सड़क के किनारे बड़े परिसर का निर्माण भविष्य में जाम और दुर्घटनाओं की आशंका को बढ़ाएगा। उन्होंने पूछा कि क्या इस पहलू पर किसी स्वतंत्र ट्रैफिक और सेफ्टी असेसमेंट की रिपोर्ट तैयार की गई है।
सार्वजनिक बहस की मांग
पूरे मामले पर कांग्रेस ने खुली बहस की चुनौती दी है। नेताओं का कहना है कि यदि सरकार और क्षेत्रीय प्रतिनिधियों में नैतिक साहस है, तो वे जनता और मीडिया के सामने इन सवालों पर खुलकर चर्चा करें, ताकि वास्तविकता सामने आ सके।
सच सामने लाने की अपील
श्रीकुमार मेनन ने कहा कि यह मामला केवल एक इमारत का नहीं, बल्कि जनता के विश्वास और टैक्स के पैसों की जवाबदेही का है। उन्होंने दावा किया कि सार्वजनिक बहस से यह साफ हो जाएगा कि गलत जानकारी किसने फैलाई और नुकसान के लिए जिम्मेदार कौन है।


