सीजी भास्कर, 22 जून : कहते हैं कि अगर हौसलों को सही तकनीक और अवसरों के पंख मिल जाएं, तो ग्रामीण परिवेश की साधारण सी दिखने वाली महिलाएं भी कामयाबी की नई उड़ान भर सकती हैं। कुछ ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के एक छोटे से गांव खोरीगांव की रहने वाली सुनीता पटेल की। सुनीता आज सिर्फ अपने घर की चौखट और चूल्हे तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे आसमान में भारी-भरकम कृषि ड्रोन उड़ाकर अपने खेतों को समृद्ध बना रही हैं और खुद ‘लखपति दीदी’ बनकर ग्रामीण सशक्तिकरण की एक अद्भुत मिसाल पेश कर रही हैं।
नमो ड्रोन दीदी योजना से बदली जिंदगी
इस बड़े बदलाव की नींव तब पड़ी जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने “नमो ड्रोन दीदी” योजना की घोषणा की थी, जिसका मुख्य मकसद ग्रामीण महिलाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़कर उनकी सालाना आय को 1 लाख रुपए से ऊपर ले जाना था। सुनीता पटेल ने इस सुनहरे मौके को हाथ से जाने नहीं दिया। दिसंबर 2023 में वे 15 दिनों के कड़े प्रशिक्षण के लिए ग्वालियर गईं। वहां उन्होंने न सिर्फ ड्रोन उड़ाने की बारीकियां सीखीं, बल्कि खेतों में कीटनाशकों और नैनो उर्वरकों के सही व सुरक्षित इस्तेमाल का तकनीकी ज्ञान भी हासिल किया। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद जब उन्हें प्रमुख उर्वरक कंपनी ‘इफको’ (IFFCO) की ओर से कृषि ड्रोन मिला, तो मानो उनकी आजीविका को नए पंख मिल गए।
सालाना 2 लाख रुपए तक की आय
साल 2024 से शुरू हुआ सुनीता का यह सफर आज 2026 में सफलता के शिखर पर है। सुनीता अब हर साल विभिन्न खेतों में दवा और खाद का छिड़काव करके 1 से 2 लाख रुपए की सम्मानजनक वार्षिक आय कमा रही हैं। सबसे खूबसूरत बात यह है कि सुनीता पैसों की परवाह किए बिना हर छोटे-बड़े किसान के खेत में उतनी ही शिद्दत से काम करती हैं। हाल ही में सारंगढ़ मंडी प्रांगण में आयोजित ‘खेती बचाओं अभियान’ और ‘प्राकृतिक खेती कार्यशाला’ में सुनीता के हुनर को देखने भारी भीड़ उमड़ी। वहां मौजूद प्रदेश के राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा के सामने जब सुनीता ने पानी से भरे भारी-भरकम ड्रोन को रिमोट के जरिए आसमान में उड़ाया और मैदान में छिड़काव का सजीव प्रदर्शन किया, तो पूरा प्रांगण तालियों से गूंज उठा। मंत्री जी ने भी उनकी इस तकनीकी कुशलता की जमकर सराहना की।
आप कैसे उठा सकते हैं इसका लाभ
सुनीता की यह सफलता दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) की ताकत को दर्शाती है। इस योजना के तहत देश की सात प्रमुख उर्वरक कंपनियां महिलाओं को ट्रेनिंग और ड्रोन सप्लाई में मदद कर रही हैं। अगर गांव की कोई भी अन्य महिला सुनीता की तरह ‘ड्रोन दीदी’ बनना चाहती है, तो उसकी पात्रता और प्रक्रिया बेहद आसान है। इसके लिए आवेदक महिला की उम्र 18 वर्ष से अधिक होनी चाहिए, वह कम से कम 10वीं पास हो और किसी पंजीकृत स्वयं सहायता समूह (SHG) की सक्रिय सदस्य हो।
चयन होने के बाद नजदीकी रिमोट पायलट ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन (RPTO) में 15 दिनों की मुफ्त पायलट और असिस्टेंट ट्रेनिंग दी जाती है, जिसके बाद DGCA द्वारा आधिकारिक ‘रिमोट पायलट सर्टिफिकेट’ मिलता है। ड्रोन खरीदने के लिए सरकार की तरफ से 80 प्रतिशत या अधिकतम 8 लाख रुपए तक की भारी सब्सिडी दी जाती है। बाकी बची रकम पर भी एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (AIF) के जरिए महज 3 प्रतिशत की रियायती ब्याज दर पर बैंक लोन मिल जाता है। इस योजना के बारे में और अधिक विस्तृत जानकारी लेने के लिए इच्छुक महिलाएं इसकी आधिकारिक वेबसाइट (https://namodronedidi.da.gov.in/) पर जाकर ऑनलाइन जानकारी ले सकते हैं। सुनीता पटेल ने आज यह साबित कर दिया है कि भारत के गांवों की तरक्की का रास्ता अब खेतों से होते हुए आसमान की तरफ जाता है।





