सीजी भास्कर, 30 अगस्त : राज्य शासन ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM Employees Strike) के अधिकारियों और कर्मचारियों की हड़ताल पर कड़ा रुख अपनाया है। सरकार ने हड़ताली कर्मियों को चेतावनी देते हुए इस महीने की अनुपस्थिति अवधि का वेतन काटने और सेवा से पृथक करने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी करने का आदेश दिया है। ये निर्देश सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएमएचओ) को भेजे गए हैं। आदेश में हड़ताल को अनुशासनहीन और अवैध ठहराया गया है।
स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया की ओर से जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि 18 अगस्त से अनुपस्थित एनएचएम कर्मियों की जानकारी तुरंत राज्य कार्यालय को भेजी जाए। साथ ही यह भी लिखा गया है कि कार्य नहीं तो वेतन नहीं (No Work No Pay) के सिद्धांत का पालन किया जाएगा। आदेश में कहा गया है कि अगर कर्मचारी उपस्थिति दर्ज नहीं करते, तो सेवा से पृथक करने की कार्यवाही की जा सकती है।
प्रदेशभर में करीब 16,000 एनएचएम कर्मी कार्यरत हैं और इनकी हड़ताल का सीधा असर ग्रामीण क्षेत्रों में दिखाई दे रहा है। प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बंद पड़े हैं, जिससे छोटी-मोटी बीमारियों की जांच और इलाज के लिए मरीजों को आंबेडकर अस्पताल और एम्स जाना पड़ रहा है। अस्पतालों पर मरीजों का दबाव बढ़ने से डॉक्टरों को भी परेशानी उठानी पड़ रही है। दस सूत्रीय मांगों को लेकर कर्मी 18 अगस्त से अनिश्चितकालीन आंदोलन पर हैं। इधर, एनएचएम कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमित कुमार मिरी ने दोहराया कि जब तक लिखित आदेश जारी नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
संचालक का आदेश भी जारी
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की संचालक डॉ. प्रियंका शुक्ला ने 25 अगस्त को आदेश जारी कर सभी जिलों से हड़ताली कर्मियों की जानकारी मांगी थी। आदेश में यह उल्लेखित किया गया था कि 13 अगस्त को स्टेट हेल्थ सोसायटी की कार्यकारिणी समिति की बैठक में अधिकांश मांगों पर निर्णय लिया गया था। इसके बावजूद कई जिलों के कर्मचारी कार्यालय नहीं पहुंचे, जो शासन ने लोकहित के विरुद्ध और अनुचित बताया।
कर्मियों की प्रमुख मांगें
एनएचएम कर्मियों की प्रमुख मांगों में संविलियन और स्थायीकरण (Regularisation of NHM Staff), पब्लिक हेल्थ कैडर की स्थापना, ग्रेड पे निर्धारण, पारदर्शी कार्य मूल्यांकन, लंबित 27% वेतन वृद्धि, नियमित भर्ती में सीटों का आरक्षण, अनुकंपा नियुक्ति, मेडिकल व अन्य अवकाश सुविधा, स्थानांतरण नीति और न्यूनतम 10 लाख कैशलेस चिकित्सा बीमा शामिल हैं। इन सभी मांगों को लेकर कर्मचारी लगातार शासन पर दबाव बना रहे हैं। इस बीच सरकार का कहना है कि जनता की स्वास्थ्य सेवाओं को बाधित करना अनुचित है और इस हड़ताल से सबसे ज्यादा नुकसान ग्रामीण मरीजों को हो रहा है। सरकार ने दोहराया कि (NHM Employees Strike) पर सख्ती से निपटा जाएगा और नियमों का उल्लंघन करने वाले कर्मियों पर कार्यवाही की जाएगी।