सीजी भास्कर, 5 मार्च। बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल (Nitish Kumar Rajya Sabha Nomination) रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल कर दिया है। इस दौरान केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah भी उनके साथ मौजूद रहे। नीतीश कुमार के इस कदम के बाद अब बिहार में नए मुख्यमंत्री को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
सूत्रों के अनुसार जल्द ही जेडीयू विधायक दल की बैठक बुलाई जा सकती है, जिसमें आगे की राजनीतिक रणनीति और सरकार के नेतृत्व को लेकर फैसला लिया जाएगा। हालांकि मुख्यमंत्री के राज्यसभा जाने के फैसले से जेडीयू के कुछ कार्यकर्ताओं और विधायकों में नाराजगी भी सामने आ रही है। उनका कहना है कि इस तरह का फैसला विधायक दल की बैठक में लिया जाना चाहिए था।
बिहार के मुख्यमंत्री Nitish Kumar पिछले सप्ताह ही 75 वर्ष के हुए हैं और अब उनके राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने की चर्चा (Nitish Kumar Rajya Sabha Nomination) तेज हो गई है। करीब दो दशक तक बिहार की राजनीति का केंद्र रहे नीतीश कुमार के दिल्ली जाने से राज्य की सत्ता समीकरण में बड़ा बदलाव हो सकता है।
राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को जल्द ही सक्रिय राजनीति में लाया जा सकता है। माना जा रहा है कि उन्हें विधान परिषद के रास्ते सदन में भेजा जा सकता है और वे उपमुख्यमंत्री पद के दावेदार बन सकते हैं।
इसके साथ ही जेडीयू कोटे से दूसरे डिप्टी सीएम पद के लिए भी नाम सामने आने लगे हैं। इसमें नीतीश कुमार के करीबी सहयोगी विजय कुमार चौधरी और वरिष्ठ नेता अशोक चौधरी के नाम चर्चा में हैं। विजय चौधरी को पार्टी का भरोसेमंद नेता (Nitish Kumar Rajya Sabha Nomination) माना जाता है, जबकि अशोक चौधरी दलित समाज से आने वाले जेडीयू के प्रमुख चेहरों में शामिल हैं।
फिलहाल बिहार की राजनीति में आगे क्या समीकरण बनेंगे, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। विधायक दल की बैठक और गठबंधन की रणनीति के बाद ही राज्य के नए मुख्यमंत्री को लेकर तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।





