सीजी भास्कर, 05 जुलाई : भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने शेयर बाजार के निवेशकों के लिए बड़ा फैसला लेते हुए ओपन मार्केट शेयर बायबैक (Open Market Share Buyback) को 1 अगस्त 2026 से दोबारा शुरू करने की मंजूरी दे दी है। पहले नियामक इस व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने की तैयारी में था, लेकिन कर व्यवस्था में बदलाव के बाद उसने अपना फैसला बदल दिया है। इस निर्णय से सूचीबद्ध कंपनियों को अब शेयर वापस खरीदने के लिए एक अतिरिक्त विकल्प मिलेगा, जिससे बाजार में तरलता और निवेशकों के लिए लचीलापन बढ़ने की उम्मीद है।
टैक्स नियमों में बदलाव के बाद सेबी का बड़ा फैसला
सेबी के अनुसार, टैक्स नियमों में समानता लागू होने के बाद ओपन मार्केट शेयर बायबैक (Open Market Share Buyback) को फिर से अनुमति दी गई है। अब यह मौजूदा टेंडर ऑफर प्रणाली (Tender Offer System) के साथ एक अतिरिक्त विकल्प के रूप में उपलब्ध होगा। नियामक का मानना है कि इससे बायबैक प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक तेज, पारदर्शी और कम खर्चीली होगी। साथ ही शेयर बाजार में अधिक उतार-चढ़ाव के दौरान कंपनियां अपने शेयरों की कीमतों को स्थिर रखने के लिए भी इस व्यवस्था का उपयोग कर सकेंगी।
क्या होता है शेयर बायबैक?
शेयर बायबैक (Share Buyback) वह प्रक्रिया है, जिसमें कोई सूचीबद्ध कंपनी अपने ही निवेशकों से अपने शेयर वापस खरीदती है। इसके बाद सामान्यतः उन शेयरों को रद्द कर दिया जाता है, जिससे बाजार में कंपनी के कुल शेयरों की संख्या कम हो जाती है। इससे प्रति शेयर आय (Earnings Per Share – EPS) बढ़ सकती है और कंपनी की वित्तीय स्थिति मजबूत दिखाई देती है। यही कारण है कि कई कंपनियां अतिरिक्त नकदी होने पर बायबैक का विकल्प अपनाती हैं।
कैसे काम करता है ओपन मार्केट बायबैक?
मौजूदा टेंडर ऑफर प्रणाली (Tender Offer System) में कंपनियां पहले से तय कीमत पर निवेशकों से शेयर खरीदती हैं, जबकि ओपन मार्केट शेयर बायबैक (Open Market Share Buyback) सामान्य शेयर कारोबार की तरह शेयर बाजार के माध्यम से किया जाता है। कंपनी पहले बायबैक की घोषणा करती है और अधिकतम खरीदे जाने वाले शेयरों की संख्या, बायबैक के लिए निर्धारित फंड तथा इसकी समयसीमा की जानकारी सार्वजनिक करती है। इसके बाद कंपनी बाजार से धीरे-धीरे शेयर खरीदती है।
निवेशकों पर क्या होगा असर?
यदि किसी निवेशक के पास उस कंपनी के शेयर हैं, जो ओपन मार्केट शेयर बायबैक (Open Market Share Buyback) ला रही है, तो वह बाजार में अपने शेयर बेच सकता है। हालांकि इस प्रक्रिया में शेयर बिकने की पूरी गारंटी नहीं होती, क्योंकि यह सामान्य बाजार लेनदेन की तरह मांग और उपलब्धता पर निर्भर करता है। निवेशक का सेल ऑर्डर तभी पूरा होगा, जब उसी मूल्य पर कंपनी या कोई अन्य खरीदार शेयर खरीदने के लिए तैयार होगा। इस वजह से ओपन मार्केट बायबैक और टेंडर ऑफर प्रणाली के बीच निवेशकों के अनुभव में भी अंतर होता है।



