सीजी भास्कर, 20 जनवरी। सूरजपुर जिले के ओड़गी स्थित सहकारी बैंक शाखा में धान बिक्री (Paddy Payment Limit) की राशि आहरण पर 20 हजार रुपये की दैनिक लिमिट तय कर दी गई है। इस नियम से किसान परेशान होने लगे हैं। पिछले वर्षों में भी समर्थन मूल्य पर धान बिक्री के बाद किसानों की इस समस्या का सामना करना पड़ा था। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की शाखाओं में मांग के अनुरूप राशि उपलब्ध नहीं होने से किसानों को एक निश्चित रकम ही दी जाती है।
किसानों (Paddy Payment Limit) का आरोप है कि खाते में पर्याप्त राशि होने के बावजूद उन्हें जरूरत के अनुसार पैसा नहीं दिया जा रहा, जिससे शादी-विवाह के सीजन में उनकी परेशानी और बढ़ जाएगी। (फोकस कीवर्ड) ओड़गी सहकारी बैंक में किसानों की लंबी कतार लग रही है। आरोप है कि नियम सभी के लिए समान नहीं है। प्रबंधक तक पहुंच रखने वाले किसानों को 49 हजार रुपये तक का भुगतान किया जा रहा है, जबकि अन्य किसानों को यह कहकर लौटा दिया जाता है कि पैसा कम आया है और 20 हजार से ज्यादा नहीं मिल सकता। दर्जनभर से अधिक किसानों को 49 हजार रुपये दिए जाने की बात सामने आई है। समर्थन मूल्य पर धान बिक्री के बाद अब राशि आहरण के लिए सहकारी बैंकों की शाखाओं में भीड़ बढ़ने लगी है। पिछले वर्षों की तरह इस बार भी प्रतिदिन 20 हजार रुपये की सीमा तय कर दी गई है।
किसानों के खाते (Paddy Payment Limit) में कितनी भी राशि जमा हो, उन्हें एक दिन में सिर्फ तय सीमा तक ही भुगतान किया जा रहा है। किसानों का सवाल है कि जब राशि उनकी है, तो उस पर लिमिट कैसे लगाई जा सकती है? सरगुजा जिला केंद्रीय सहकारी बैंक के अंतर्गत सरगुजा, सूरजपुर, कोरिया, बलरामपुर और एमसीबी जिले की सहकारी बैंक शाखाओं में भी यही हालात बनते नजर आ रहे हैं। नकदी की कमी के चलते मांग के अनुरूप भुगतान नहीं हो पा रहा, जिससे किसानों में नाराजगी बढ़ रही है। बैंक प्रबंधन के मुताबिक ओड़गी शाखा में मात्र 50 लाख रुपये की नकदी उपलब्ध कराई गई थी, जबकि बड़ी संख्या में किसान राशि आहरण के लिए पहुंचे थे। किसानों की जरूरत ज्यादा रुपये की है, इसलिए एक निश्चित राशि दी जा रही है।
जरूरतमंदों को दी गई ज्यादा राशि
इस संबंध में सहकारी बैंक (Paddy Payment Limit) ओड़गी के प्रबंधक संतोष मिंज ने बताया कि जिन 12 लोगों को 49-49 हजार रुपये दिए गए हैं, उनके परिवार के सदस्य अस्पताल में भर्ती हैं या उनकी एक्सीवेटर की किस्त बकाया थी, इसलिए उन्हें अधिक राशि दी गई। किसानों को निराश होकर वापस नहीं लौटना पड़े इसलिए कम के कम 20-20 हजार रुपये दिए जाने की व्यवस्था बनाई गई। किसानों का आरोप है कि कतार में खड़े कई अन्य किसान भी बीमार थे, इसके बावजूद उन्हें अधिक राशि नहीं दी गई। किसानों का कहना है कि बैंक में आदमी देखकर भुगतान किया जा रहा है।




