सीजी भास्कर, 26 अप्रैल : छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में धान खरीदी सीजन के बाद अब उठाव की प्रक्रिया विवादों और अनिश्चितता के घेरे में आ गई है। जिले के विभिन्न उपार्जन केंद्रों से धान के उठाव के लिए मार्कफेड द्वारा ‘डिलीवरी ऑर्डर’ (DO) और ‘ट्रांसपोर्ट ऑर्डर’ (TO) तो जारी कर दिए गए हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है। वर्तमान में सोसायटियों में लाखों रुपये का धान रहस्यमय तरीके से गायब हो गया है, जिससे एक गंभीर धान उठाव संकट (Paddy Procurement Crisis) पैदा हो गया है।
हाल ही में जिला प्रशासन ने इस अव्यवस्था को लेकर समितियों की एक आपात बैठक ली। बैठक में यह चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है कि कई केंद्रों में धान का भारी ‘शार्टेज’ (कमी) है। कागजों पर जितना स्टॉक दर्ज है, भौतिक सत्यापन में उतना धान मौके पर मौजूद नहीं मिल रहा है। प्रशासन ने इस समस्या (Paddy Procurement Crisis) पर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए दो टूक शब्दों में कहा है कि किसी भी हाल में धान का उठाव सुनिश्चित किया जाए और जो कमी पाई गई है, उसकी भरपाई समितियों को ही करनी होगी।
प्रशासनिक सख्ती के बाद अब समिति प्रबंधकों के बीच खलबली मच गई है। आनन-फानन में प्रबंधक अब राइस मिलरों से संपर्क कर रहे हैं और उनसे धान उठाने की मिन्नतें कर रहे हैं। हालांकि, मिलर इस खराब गुणवत्ता वाले या गायब हो चुके धान को उठाने में कोई रुचि (Paddy Procurement Crisis) नहीं दिखा रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि उपार्जन केंद्रों से धान की चोरी या लापरवाही के कारण गायब होने की वजह से मिलर अब इस जोखिम को अपने सिर नहीं लेना चाहते।
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि जब केंद्रों पर धान का भौतिक अस्तित्व ही नहीं है, तो मिलर उठाव किस आधार पर करेंगे? सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक जिले में कुल 1 लाख 56 हजार 825 क्विंटल धान का उठाव लंबित है। धान का गायब होना और मिलरों की बेरुखी इस विवाद (Paddy Procurement Crisis) को और तूल दे रही है। यदि जल्द ही इस गायब धान का हिसाब नहीं मिला, तो समितियों और संबंधित अधिकारियों पर बड़ी गाज गिरना तय है। फिलहाल, प्रशासन नुकसान की गणना और दोषियों की पहचान करने में जुटा हुआ है।


