सीजी भास्कर, 26 अप्रैल : छत्तीसगढ़ की कृषि व्यवस्था में एक बड़े वैज्ञानिक युग (Revolutionary Rice Breeding) की शुरुआत हो चुकी है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर ने भाभा अटामिक रिसर्च सेंटर (BARC) ट्रॉम्बे के साथ मिलकर धान की ऐसी 6 ‘म्यूटेंट’ किस्में तैयार की हैं, जो खेती के पुराने ढर्रे को पूरी तरह बदल देंगी। कृषि उत्पादन आयुक्त श्रीमती शहला निगार ने रायपुर कृषि महाविद्यालय में आयोजित एक भव्य समारोह में प्रगतिशील किसानों को इन किस्मों के मिनी किट वितरित किए। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि क्रांतिकारी धान प्रजनन की यह तकनीक छत्तीसगढ़ के कृषि क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगी।
‘म्यूटेशन’ का जादू: कम ऊंचाई
विकसित की गई ये नई किस्में छत्तीसगढ़ की मशहूर और पारंपरिक किस्मों का उन्नत रूप हैं। कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने बताया कि म्यूटेशन ब्रीडिंग के माध्यम से फसलों के अवांछित गुणों को हटाकर वांछित गुणों (जैसे कम अवधि में पकना, बौना कद और कीटों से लड़ने की क्षमता) को जोड़ा गया है। क्रांतिकारी धान प्रजनन (Revolutionary Rice Breeding) के तहत जारी की गई किस्मों में विक्रम टीसीआर, विष्णुभोग म्यूटेंट, सोनागाथी म्यूटेंट, दुबराज म्यूटेंट-1, बौना लुचाई और जवाफूल म्यूटेंट शामिल हैं। ये किस्में न केवल जल्दी पकती हैं, बल्कि इनकी पैदावार भी परंपरागत प्रजातियों से कहीं अधिक है।
हीरा और सोना है छत्तीसगढ़ का धान
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि शहला निगार ने कहा कि छत्तीसगढ़ का असली हीरा और सोना यहां (Revolutionary Rice Breeding) का धान ही है। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि देशभर में घूमने के बावजूद उन्हें छत्तीसगढ़ जैसा स्वादिष्ट चावल कहीं नहीं मिला। उन्होंने वैज्ञानिकों की सराहना करते हुए कहा कि क्रांतिकारी धान प्रजनन (Revolutionary Rice Breeding) के माध्यम से रेडिएशन तकनीक का उपयोग कर विकसित ये फसलें किसानों की आय दोगुनी करने में सक्षम हैं। राज्य सरकार इस खरीफ वर्ष में 40 प्रतिशत पुरानी किस्मों को हटाकर इन नई किस्मों को खेत तक पहुंचाने का लक्ष्य लेकर चल रही है।
परमाणु ऊर्जा का खेती में सकारात्मक उपयोग
भाभा अटामिक रिसर्च सेंटर के विशेषज्ञों ने किसानों को बताया कि नाभिकीय ऊर्जा का उपयोग केवल बिजली बनाने के लिए नहीं, बल्कि गांव (Revolutionary Rice Breeding) के खेतों को खुशहाल बनाने के लिए भी किया जा रहा है। म्यूटेशन ब्रीडिंग एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें रेडिएशन के जरिए बीजों के डीएनए में सुधार किया जाता है। क्रांतिकारी धान प्रजनन (Revolutionary Rice Breeding) के इस प्रोजेक्ट ने छत्तीसगढ़ की सुगंधित और दुर्लभ किस्मों के गुणों को संरक्षित करते हुए उन्हें आधुनिक खेती के अनुकूल बना दिया है।
किसानों को मिनी किट, अब खेतों में दिखेगा असर
समारोह के दौरान प्रदेश भर से आए किसानों को इन उन्नत किस्मों के बीज किट प्रदान किए गए। यहां (Revolutionary Rice Breeding) मौजूद वैज्ञानिकों ने किसानों से आह्वान किया कि वे अब परंपरागत और कम उपज वाली किस्मों के बजाय इन आधुनिक बीजों को अपनाएं। यह क्रांतिकारी धान प्रजनन (Revolutionary Rice Breeding) न केवल सूखे के प्रति सहनशील है, बल्कि इसमें पोषण की मात्रा भी अधिक है। इस ऐतिहासिक पहल से गांव (Revolutionary Rice Breeding) के उन छोटे किसानों को सबसे ज्यादा फायदा होगा, जिनकी फसलें प्राकृतिक आपदाओं या कीटों के कारण बर्बाद हो जाती थीं।


