सीजी भास्कर, 05 जुलाई : छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाने वाली पंडवानी की अमर स्वर साधिका पद्म विभूषण तीजन बाई (Padma Vibhushan Teejan Bai ) का रविवार तड़के करीब 3:15 बजे निधन हो गया। उनके निधन से छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश के कला और संस्कृति जगत में शोक की लहर है। उनका अंतिम संस्कार दुर्ग जिले के पैतृक गांव गनियारी में राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा। जिला प्रशासन अंतिम संस्कार की तैयारियों में जुटा हुआ है। सुबह 11 बजे के बाद उन्हें अंतिम विदाई दी जाएगी।
गनियारी गांव में प्रशासन ने अंतिम संस्कार की सभी आवश्यक व्यवस्थाएं शुरू कर दी हैं। तीजन बाई के घर के बाहर श्रद्धांजलि देने वालों का लगातार पहुंचना जारी है। परिवार के कुछ सदस्य रायपुर स्थित एम्स अस्पताल में हैं, जबकि अन्य परिजन गांव में मौजूद हैं। जैसे-जैसे उनके निधन की सूचना लोगों तक पहुंच रही है, वैसे-वैसे कलाकार, जनप्रतिनिधि, शुभचिंतक और प्रशंसक बड़ी संख्या में गनियारी पहुंच रहे हैं।
तीजन बाई पंडवानी की कापालिक शैली की सबसे प्रभावशाली कलाकारों में गिनी जाती थीं। वे तंबूरे के साथ महाभारत की कथा का गायन और अभिनय करती थीं तथा भीम, अर्जुन, द्रौपदी सहित कई पात्रों को अपनी प्रस्तुति में जीवंत कर देती थीं। उन्होंने देश-विदेश में एक हजार से अधिक मंचों पर प्रस्तुति देकर छत्तीसगढ़ की लोककला को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई।
भारतीय लोककला में उनके अतुलनीय योगदान के लिए उन्हें वर्ष 1988 में पद्मश्री, 1995 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, 2003 में पद्म भूषण तथा 2019 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था। उनके निधन को भारतीय लोकसंगीत और पंडवानी परंपरा के लिए अपूरणीय क्षति माना जा रहा है।
राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई Padma Vibhushan Teejan Bai
छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध पंडवानी गायिका पद्म विभूषण तीजन बाई का अंतिम संस्कार रविवार को दुर्ग जिले के गनियारी गांव में राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा। प्रशासन ने बारिश के बीच अंतिम संस्कार की सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। सुबह 11 बजे के बाद उन्हें अंतिम विदाई दी जाएगी।
बारिश के बीच अंतिम संस्कार की तैयारी
गनियारी और आसपास के क्षेत्र में रविवार सुबह से लगातार बारिश हो रही है। इसके बावजूद जिला प्रशासन अंतिम संस्कार की तैयारियों में जुटा हुआ है। तीजन बाई के निवास के सामने वाटरप्रूफ पंडाल लगाए जा रहे हैं। मुक्तिधाम की साफ-सफाई के साथ वहां भी आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं, ताकि अंतिम दर्शन और अंतिम संस्कार में पहुंचने वाले लोगों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। प्रशासन के अनुसार सुबह 11 बजे के बाद राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।



