सीजी भास्कर, 18 मार्च। चैत्र नवरात्रि की शुरुआत के साथ ही आस्था का बड़ा केंद्र बनने (Patal Bhairavi Temple Rajnandgaon) जा रहा है मां पाताल भैरवी मंदिर, जहां इस बार 2100 मनोकामना ज्योति कलश प्रज्वलित किए जाएंगे। संस्कारधानी का यह प्रसिद्ध मंदिर हर साल की तरह इस बार भी देश-विदेश के श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है।
अनूठी संरचना, शिवलिंग जैसा मंदिर बना आकर्षण
बर्फानी आश्रम में स्थित यह मंदिर अपनी अद्भुत वास्तुकला के लिए जाना जाता है। तीन मंजिला इस मंदिर की बनावट शिवलिंग के आकार जैसी दिखाई देती है, जो इसे और भी खास बनाती है।
ऊपरी तल पर भगवान शिव और नंदी विराजमान हैं, मध्य तल पर मां त्रिपुर सुंदरी राजराजेश्वरी का दरबार सजा है, जबकि पाताल तल पर मां पाताल भैरवी के दर्शन होते हैं – यही इस मंदिर का सबसे बड़ा आकर्षण है।
2100 ज्योति कलश, मनोकामनाओं की लौ
इस बार नवरात्रि के दौरान 2100 ज्योति कलश प्रज्वलित किए जाएंगे, जो श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक माने जाते हैं।
मंदिर समिति के अनुसार, ये सभी कलश तेल से जलाए जाते हैं और हर कलश एक भक्त की मनोकामना से जुड़ा होता है।
विदेशों तक फैली आस्था, दूर-दूर से पहुंच रहे श्रद्धालु
मां पाताल भैरवी की महिमा सिर्फ छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं है। मलेशिया, थाईलैंड और जर्मनी जैसे देशों में रहने वाले भक्त भी अपने परिवारों के माध्यम से यहां ज्योति कलश स्थापित (Patal Bhairavi Temple Rajnandgaon) करा रहे हैं।
इससे साफ है कि यह मंदिर अब वैश्विक आस्था का केंद्र बन चुका है।
दर्शन से लेकर भंडारे तक, हर सुविधा उपलब्ध
नवरात्रि के दौरान श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं।
24 घंटे दर्शन की सुविधा
ठहरने की व्यवस्था
नि:शुल्क भंडारा
मंदिर प्रबंधन ने यह सुनिश्चित किया है कि श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।
सुरक्षा और व्यवस्था पर खास फोकस
भीड़ को देखते हुए प्रशासन और मंदिर समिति ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। मंदिर राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित है, जिससे यहां पहुंचना (Patal Bhairavi Temple Rajnandgaon) आसान है। राजनांदगांव रेलवे स्टेशन से इसकी दूरी लगभग 3 किलोमीटर है, जिससे बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को भी सुविधा मिलती है।
नवरात्रि में जगमगाएगा विश्वास का दीप
ज्योति कलशों की रोशनी के बीच यह मंदिर सिर्फ पूजा का स्थान नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और विश्वास का संगम बन जाता है। नवरात्रि के नौ दिन यहां हर पल भक्ति और ऊर्जा से भरे रहते हैं, जहां हर दीपक एक उम्मीद और एक प्रार्थना का प्रतीक होता है।





