सीजी भास्कर, 01 जून : छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले से भ्रष्टाचार और दबंगई (Pendra Panchayat Corruption Case) का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक गलियारे में भारी हड़कंप मचा दिया है। यहां एक पंचायत सचिव पर सरपंच के अधिकारों का सरेआम कूटनीतिक अतिक्रमण करने और 15वें वित्त आयोग की लाखों रुपये की राशि में भारी वित्तीय अनियमितता करने के गंभीर आरोप लगे हैं। इस पूरे महा-घोटाले का सस्पेंस तब खत्म हुआ जब जिला पंचायत कार्यालय का एक कड़ा पत्र सोशल मीडिया पर लीक हो गया। इस वित्तीय गड़बड़ी के बीच आरोपी सचिव अब एक ग्रामीण के साथ कड़ाई से मारपीट और जमीन विवाद के संगीन मामले में भी बुरी तरह घिर चुका है।
दरअसल, यह पूरा मामला पिपरखुंटी ग्राम पंचायत (Pendra Panchayat Corruption Case) से जुड़ा हुआ है। शिकायत के मुताबिक, मूल रूप से तराईगांव और सेमरा ग्राम पंचायत में पदस्थ शातिर सचिव किशन राठौर ने अपनी अधिकार सीमा से बाहर जाकर पिपरखुंटी ग्राम पंचायत के प्रशासनिक कार्यों में अवैध रूप से हस्तक्षेप किया। आरोप है कि सचिव ने सरपंच के डिजिटल हस्ताक्षर (डोंगली) का कथित तौर पर दुरुपयोग किया और कड़ाई से करीब 17 लाख 26 हजार 600 रुपये की मोटी रकम सरकारी खाते से उड़ा ली। स्थानीय ग्रामीणों का साफ कहना है कि यह राशि 15वें वित्त आयोग के तहत गांव के विकास कार्यों के लिए प्राप्त हुई थी। जिला पंचायत कार्यालय द्वारा इस वित्तीय हेराफेरी को लेकर जारी कड़े पत्रों के बाद शिकायतकर्ताओं ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग तेज कर दी है।
इस बड़े भ्रष्टाचार के मामले में एक नया और खौफनाक मोड़ तब आया, जब भड़रापारा निवासी अमन साहू ने इसी पंचायत सचिव किशन राठौर और उसके गुर्गों के खिलाफ सरेआम मारपीट करने का एक आक्रामक आरोप लगाया। शिकायत के अनुसार, बीती 20 अप्रैल 2026 को खसरा नंबर 2805 की पैतृक भूमि विवाद के दौरान सचिव और अन्य लोगों ने अमन साहू पर कड़ा हमला कर दिया, जिससे उसे गंभीर चोटें आईं। इस जमीन विवाद और खूनी संघर्ष के बाद पीड़ित ने सीधे थाने पहुंचकर आरोपियों के खिलाफ नामजद शिकायत दर्ज कराई।
मामले की संवेदनशीलता और जिला पंचायत के पत्रों के आधार पर पेंड्रा पुलिस तुरंत एक्शन मोड में आ गई है। पुलिस ने अमन साहू की शिकायत को कड़ाई से संज्ञान में लेते हुए रसूखदार पंचायत सचिव और उसके साथियों के खिलाफ नए कानून भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 115(2), 296, 351(3) और 3(5) के तहत गंभीर अपराध दर्ज कर लिया है। पुलिस और जिला प्रशासन की संयुक्त टीमें अब एक तरफ जहां 17.26 लाख रुपये के डिजिटल डाके (वित्तीय अनियमितता) की फाइलों को कड़ाई से खंगाल रही हैं, वहीं दूसरी तरफ जमीन विवाद में हुई मारपीट को लेकर आरोपियों की धरपकड़ के लिए दबिश दे रही हैं। इस बड़ी कार्रवाई के बाद से जिले के भ्रष्ट अधिकारी-कर्मचारियों में भारी खलबली मची हुई है।




