सीजी भास्कर, 27 अप्रैल : छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले में एक साधारण से दिखने वाले किसान ने वह कर दिखाया है, जिसकी कल्पना बड़े-बड़े दिग्गज नहीं कर पाए थे। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PM Matsya Sampada Yojana) के प्रभावी क्रियान्वयन ने जिले की तस्वीर बदल दी है और मत्स्य पालन के क्षेत्र में एक ऐसी क्रांति ला दी है, जिसने मछुआरों को रातों-रात लखपति बनाने की राह खोल दी है। इस योजना का असली मकसद केवल मछली पालना नहीं, बल्कि संसाधनों का वह संतुलित और समावेशी इस्तेमाल करना है, जिससे किसानों की आय दोगुनी नहीं बल्कि कई गुना बढ़ जाए। सरकार की इस दूरगामी सोच ने अब जमीन पर अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है ।
बदल दी गंगाधर की किस्मत
सातगांव के रहने वाले गंगाधर नेताम आज उन लोगों के लिए मिसाल बन चुके हैं जो खेती-किसानी को घाटे का सौदा मानते थे। गंगाधर ने पारंपरिक तरीकों को छोड़कर अपनी जमीन पर ‘पोंड लाइनर’ तकनीक का जुआ खेला, जो पूरी तरह सफल रहा। उन्होंने योजना (PM Matsya Sampada Yojana) के तहत 14 लाख रुपये की भारी लागत से एक आधुनिक तालाब बनवाया, जहां उन्हें सरकार की तरफ से 8 लाख रुपये का बंपर अनुदान मिला। इस खास तकनीक में तालाब के भीतर ऐसी परत बिछाई जाती है जो पानी की एक बूंद भी बर्बाद नहीं होने देती। इसी तकनीक के बूते गंगाधर ने कम जगह में इतना ज्यादा उत्पादन कर लिया कि देखने वाले दंग रह गए ।

35 क्विंटल पैदावार और लाखों का मुनाफा
गंगाधर नेताम की सफलता के आंकड़े किसी को भी हैरान कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि साल के महज दो सीजन में वे 35 क्विंटल तक मछली का उत्पादन कर रहे हैं, जिससे उनकी सालाना कमाई 4 लाख रुपये के पार पहुंच गई है। यह सब मुमकिन हुआ विभाग (PM Matsya Sampada Yojana) के तकनीकी मार्गदर्शन और उस आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर की वजह से, जहां मछलियों की वृद्धि सामान्य तालाबों के मुकाबले कहीं ज्यादा तेज होती है। जहां पहले पानी के रिसाव और चिलचिलाती गर्मी से मछलियां मर जाती थीं, वहां अब यह नई तकनीक सुरक्षा कवच बनकर उभरी है। आज गंगाधर की सफलता को देखकर जिले के अन्य युवा भी इस क्षेत्र में उतरने को बेताब पहुंचे हैं ।
पानी का रिसाव बंद और नोटों की बरसात शुरू
पोंड लाइनर तकनीक असल में जल संरक्षण का एक ब्रह्मास्त्र साबित हो रही है। इसमें जलाशय के किनारों और तल पर विशेष प्लास्टिक शीट बिछाई जाती है, जिससे पानी का जमीन के अंदर रिसना पूरी तरह बंद हो जाता है। यह उन इलाकों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है जहां जल स्तर नीचे चला गया है या जहां पानी की कमी है। लाइनर के उपयोग से पानी स्थिर रहता है, जिससे मछलियों को प्राकृतिक वातावरण मिलता है और उनकी ग्रोथ कई गुना बढ़ जाती है। लागत में कमी और उत्पादन में भारी उछाल ही वह राज है, जिसके पीछे (PM Matsya Sampada Yojana) का हाथ है और इसी वजह से आज छत्तीसगढ़ के सुदूर अंचलों में आर्थिक समृद्धि के नए द्वार खुल रहे हैं।


