सीजी भास्कर 4 दिसंबर पटना के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में बुधवार सुबह से हालात बिगड़े हुए हैं। PMCH Doctors Strike की वजह एक ऐसी घटना बनी, जो शुरू तो कहासुनी से हुई, लेकिन कुछ ही मिनटों में मारपीट और हंगामे में बदल गई। ब्रेन हेमरेज से पीड़ित बुजुर्ग सुरेश सिंह को परिजन इमरजेंसी में लेकर आए थे। डॉक्टरों ने ईसीजी जांच के आधार पर उन्हें मृत घोषित किया, लेकिन परिवार ने इसे मानने से इंकार कर दिया और यहीं से विवाद बढ़ा।
परिजनों ने महिला डॉक्टर से की बदसलूकी, फिर हुआ हमला
जैसे ही जूनियर डॉक्टर ने परिजनों को बताया कि ईसीजी रिपोर्ट साफ दिखाती है कि मरीज की सांसें नहीं चल रही, परिवार का गुस्सा अचानक भड़क उठा। चश्मदीदों के मुताबिक परिजनों ने महिला डॉक्टर के साथ अपशब्द कहे, धक्का-मुक्की की और स्थिति देखते ही देखते हिंसक हो गई। वहां मौजूद अन्य डॉक्टरों ने बीच-बचाव की कोशिश की, लेकिन कोई सुनने को तैयार नहीं था। पूरा इमरजेंसी वार्ड अफरा-तफरी में बदल गया।
जूनियर डॉक्टरों ने की बैठक, सुरक्षा को लेकर सामूहिक हड़ताल का ऐलान
घटना के बाद डॉक्टरों में नाराज़गी साफ दिख रही थी। बुधवार शाम जूनियर डॉक्टरों की बैठक हुई, जिसमें सर्वसम्मति से हड़ताल पर जाने का फैसला लिया गया। डॉक्टरों का कहना है कि जब तक सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होती, वे काम पर वापस नहीं लौटेंगे। doctor safety demand का यह मुद्दा कई महीनों से उठ रहा था, लेकिन इस बार हालात कुछ ज़्यादा गंभीर हो गए।
इमरजेंसी पूरी तरह बंद… 2000 से ज्यादा मरीज लौटे घर
हड़ताल का सबसे बड़ा असर अस्पताल की इमरजेंसी पर दिख रहा है। बुधवार शाम से ही इमरजेंसी वार्ड बंद है और मरीजों की लंबी कतारें लग रही हैं। अब तक करीब 2000 से ज्यादा लोग बिना इलाज के लौट चुके हैं। कई गंभीर मरीजों को निजी अस्पतालों में शिफ्ट करना पड़ा है। स्टाफ की कमी के चलते वार्डों में भी अव्यवस्था है।
अस्पताल प्रशासन की अपील, डॉक्टरों का स्पष्ट जवाब—पहले सुरक्षा, फिर सेवा
अस्पताल प्रशासन ने हड़ताली डॉक्टरों से लौटने की अपील की है। अधीक्षक ने कहा है कि आवश्यक सेवाएं ठप रहने से हालात बिगड़ रहे हैं, इसलिए डॉक्टर जल्द निर्णय लें। हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि यह केवल कामकाज का मुद्दा नहीं, बल्कि जान का सवाल है। जब तक सुरक्षा के ठोस इंतजाम नहीं किए जाते, हड़ताल समाप्त नहीं होगी।
स्थिति पर सरकार की निगाहें—जल्द कार्रवाई की बात सामने आई
प्रबंधन की मानें तो हड़ताल लंबी खिंचने पर सरकार हस्तक्षेप कर सकती है। अधिकारियों का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं को अनिश्चितकाल तक बाधित नहीं रहने दिया जाएगा। वहीं डॉक्टरों ने स्पष्ट कहा है—“हम सेवा के लिए हमेशा तैयार हैं, लेकिन असुरक्षा में काम नहीं करेंगे।”





