सीजी भास्कर, 09 जनवरी। उदंती-सीतानदी अभ्यारण्य क्षेत्र में वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर चल रहे सघन अभियान के तहत वन विभाग (Poachers Arrested India) को बड़ी सफलता मिली है। गरियाबंद जिले के कुल्हाड़ीघाट परिक्षेत्र अंतर्गत ओड़ सर्कल में की गई कार्रवाई में अवैध शिकार में संलिप्त 6 शिकारियों को गिरफ्तार किया गया है। यह कार्रवाई राज्य में वन्यजीव अपराधों पर अंकुश लगाने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।
राज्य सरकार द्वारा वन एवं वन्यप्राणियों के संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। इसी क्रम में वन मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देश पर वन विभाग के उच्च अधिकारियों के साथ लगातार समीक्षा बैठकें आयोजित की जा रही हैं। इन बैठकों में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वन सुरक्षा में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
तकनीक और गश्त से बढ़ी निगरानी
वन विभाग द्वारा शिकार की घटनाओं को रोकने के लिए नियमित एंटी स्नेयर वॉक अभियान चलाया जा रहा है। इसके साथ ही ड्रोन, ट्रैप कैमरे और आधुनिक निगरानी तकनीकों का उपयोग (Poachers Arrested India) बढ़ाया गया है। पिकनिक या अन्य गतिविधियों की आड़ में होने वाले अवैध शिकार पर रोक लगाने के लिए संवेदनशील इलाकों में चौकसी और गश्त को और सख्त किया गया है।
कहां से पकड़े गए आरोपी
वन विभाग की टीम ने इस कार्रवाई में ग्राम सुनाबेड़ा (ओडिशा) के 2 तथा ग्राम ओड़ के 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। सभी आरोपी वन क्षेत्र में अवैध रूप से शिकार की गतिविधियों में संलिप्त पाए गए।
क्या-क्या बरामद हुआ
गिरफ्तार शिकारियों के पास से खरगोश पकड़ने के फंदे, तीर-कमान और मछली पकड़ने के जाल जैसी शिकार सामग्री जब्त की गई है। इन सामग्रियों का उपयोग वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाने में किया जा रहा था।
वन विभाग द्वारा पकड़े गए सभी 6 आरोपियों के खिलाफ दो अलग-अलग प्रकरणों में प्रारंभिक अपराध रिपोर्ट (पीओआर) दर्ज (Poachers Arrested India) की गई है। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत वैधानिक कार्रवाई करते हुए 7 जनवरी को सभी आरोपियों को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, गरियाबंद के समक्ष पेश किया गया।
वन अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की सख्त कार्रवाई से शिकारियों के हौसले पस्त होंगे और अभ्यारण्य क्षेत्र में वन्यजीवों को सुरक्षित वातावरण मिल सकेगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि आने वाले समय में गश्त अभियान को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा, ताकि भविष्य में शिकार जैसी गतिविधियों पर पूरी तरह लगाम लगाई जा सके।


