सीजी भास्कर 1 मार्च गरियाबंद जिले के फिंगेश्वर क्षेत्र से जुड़े जघन्य अपराध में अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। पीड़िता की उम्र महज़ सात साल होने के चलते कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि ऐसे मामलों में नरमी की कोई गुंजाइश नहीं है। मामले की सुनवाई के बाद आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। अदालत का यह फैसला (POCSO Life Imprisonment) के तहत बच्चों के खिलाफ अपराधों पर जीरो-टॉलरेंस की नीति को रेखांकित करता है।
2023 की घटना, 2026 में आया फैसला
यह मामला वर्ष 2023 में दर्ज हुआ था, जब पीड़िता के परिजनों ने फिंगेश्वर थाना में शिकायत दी। लंबी सुनवाई और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद 2026 में अदालत ने अपना फैसला सुनाया। इस दौरान मेडिकल रिपोर्ट, बयान और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को परखा गया। अदालत ने माना कि अपराध की प्रकृति बेहद गंभीर है और (POCSO Life Imprisonment) के प्रावधानों के तहत कठोर दंड ही न्यायोचित है।
सुनसान खेत में हुई वारदात, पुलिस जांच निर्णायक
जांच में सामने आया कि आरोपी ने मासूम बच्ची को बहला-फुसलाकर सुनसान खेत की ओर ले गया और वहां वारदात को अंजाम दिया। शिकायत मिलते ही पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए मामला दर्ज किया और फोरेंसिक व मेडिकल साक्ष्य जुटाए। विवेचना के दौरान जुटाए गए सबूतों ने अदालत के सामने (POCSO Life Imprisonment) के तहत दोष सिद्ध करने में अहम भूमिका निभाई।
विवेचना और अभियोजन की मजबूत पैरवी
मामले की जांच उप पुलिस अधीक्षक द्वारा की गई और विस्तृत चालान न्यायालय में पेश किया गया। अभियोजन पक्ष ने गवाहों के बयान, चिकित्सकीय प्रमाण और घटनास्थल से जुड़े साक्ष्यों को क्रमबद्ध ढंग से रखा। अदालत ने माना कि अभियोजन ने संदेह से परे अपराध सिद्ध किया है, इसलिए (POCSO Life Imprisonment) के तहत आरोपी को उम्रकैद और अर्थदंड दिया जाना उचित है।
पीड़िता के परिवार को मिला न्याय का भरोसा
फैसले के बाद पीड़िता के परिजनों ने राहत की सांस ली। उन्होंने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया लंबी जरूर थी, लेकिन अंततः न्याय मिला। कानूनी जानकारों का मानना है कि यह फैसला समाज को स्पष्ट संदेश देता है कि बच्चों के खिलाफ अपराध करने वालों के लिए सख्त सजा तय है। (POCSO Life Imprisonment) जैसे फैसले भविष्य में ऐसे अपराधों पर रोक लगाने में प्रभावी भूमिका निभाते हैं।






