सीजी भास्कर, 19 सितंबर। रायपुर में डीडी नगर निवासी 60 वर्षीय एक प्रोफेसर, जो मनोविज्ञान में पीएचडी हैं, साइबर ठगी (Police Impersonation) का शिकार हो गईं। यह ठगी एक नए तरीके से हुई, जिसे ‘डिजिटल अरेस्ट’ कहा जा रहा है। ठगों ने खुद को दिल्ली सीआईडी का अधिकारी बताया और प्रोफेसर को एक अवैध लेन-देन के झूठे मामले में फंसाने की धमकी दी। उन्होंने प्रोफेसर को इतना डरा दिया कि उन्होंने एक दिन तक खुद को घर में बंद कर लिया और पांच लाख रुपये गंवा दिए।
कैसे हुआ ‘डिजिटल अरेस्ट’?
यह घटना 15 सितंबर को हुई, जब प्रोफेसर को एक फोन कॉल (Police Impersonation) आया। कॉल करने वाले ने अपना नाम दया नायक बताया और खुद को दिल्ली सीआईडी का अधिकारी बताया। उसने दावा किया कि प्रोफेसर के बैंक खाते का इस्तेमाल एक अवैध लेन-देन में हुआ है और इस मामले में दिल्ली में एक केस दर्ज है। ठग ने प्रोफेसर को डराया कि अगर उन्होंने सहयोग नहीं किया तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
घबराई हुई प्रोफेसर ने डर के मारे ठगों के निर्देशों का पालन करना शुरू कर दिया। ठग ने उन्हें कहा कि पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए उन्हें जांच में सहयोग करना होगा और घर में ही रहना होगा। इस ‘डिजिटल अरेस्ट’ के दबाव में, प्रोफेसर ने एक दिन तक घर से बाहर कदम नहीं रखा। ठगों ने इसी दौरान उनसे पैसे की मांग की, जिसके बाद प्रोफेसर ने पांच लाख रुपये उन्हें दे दिए।
जब हुआ ठगी का एहसास
पैसे देने के बाद जब प्रोफेसर को ठगी का एहसास हुआ, तो उन्होंने तुरंत अपने परिवार को इस बारे में बताया और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है। यह घटना साइबर क्राइम (Police Impersonation) के एक नए और खतरनाक रूप को दर्शाती है, जिसमें ठग पीड़ितों को मानसिक रूप से इतना कमजोर कर देते हैं कि वे डर के मारे उनकी हर बात मान लेते हैं।
साइबर ठगी से कैसे बचें?
यह घटना हमें सिखाती है कि हमें हमेशा सतर्क रहना चाहिए। किसी भी सरकारी अधिकारी या पुलिस कर्मी के नाम पर आने वाले फोन कॉल पर तुरंत भरोसा न करें। ऐसे मामलों में, हमेशा उनकी पहचान की पुष्टि करें और किसी भी तरह की धमकी या दबाव में पैसे का लेन-देन न करें। अगर आपको ऐसा कोई कॉल आता है, तो तुरंत अपने परिवार वालों को बताएं और पुलिस में शिकायत करें।





