सीजी भास्कर 20 जनवरी Police Vehicle Safety in Chhattisgarh : छत्तीसगढ़ में कानून-व्यवस्था की ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों की सुरक्षा को लेकर नई चिंता उभर कर सामने आई है। हालात ऐसे बन गए हैं कि अब शासकीय पुलिस वाहनों और पेट्रोलिंग गाड़ियों को भी अतिरिक्त सुरक्षा कवच देना पड़ रहा है। कई जिलों में हुई हिंसक घटनाओं के बाद वाहनों पर मजबूत लोहे की जालियां लगाने का फैसला अमल में लाया जा रहा है।
भीड़ के हमलों के बाद लिया गया फैसला
बीते कुछ महीनों में अलग-अलग इलाकों में भीड़ द्वारा पुलिस वाहनों पर पथराव, तोड़फोड़ और जवानों पर हमले की घटनाएं सामने आईं। कई मामलों में पुलिसकर्मियों को गंभीर चोटें भी आईं। इन्हीं हालातों को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को नए सिरे से मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं।
पेट्रोलिंग गाड़ियों पर विशेष इंतजाम
पुलिस मुख्यालय स्तर से मिले निर्देशों के बाद थानों और पुलिस लाइनों में उपलब्ध शासकीय वाहनों पर लोहे की जालियां लगाई जा रही हैं। खासतौर पर पेट्रोलिंग के दौरान उपयोग में आने वाली गाड़ियों को प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि अचानक होने वाले हमलों से भीतर बैठे जवान सुरक्षित रह सकें।
अफसरों की गाड़ियों तक पहुंचेगा कवच
यह व्यवस्था केवल थानों की गाड़ियों तक सीमित नहीं रहने वाली है। राजपत्रित अधिकारियों की शासकीय गाड़ियों पर भी सुरक्षा जालियां लगाए जाने की तैयारी है। संवेदनशील इलाकों में निरीक्षण और दौरे के दौरान अफसरों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह कदम जरूरी माना जा रहा है।
किराए की गाड़ियों पर असमंजस
पुलिस विभाग कई स्थानों पर किराए की निजी गाड़ियों का भी इस्तेमाल करता है। ऐसे वाहनों पर लोहे की जालियां लगाना एक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। वाहन मालिकों की सहमति, गाड़ी की बनावट और लागत जैसे पहलुओं पर मंथन चल रहा है, हालांकि विभाग का मानना है कि ड्यूटी पर तैनात जवान की सुरक्षा सर्वोपरि है।
ड्राइविंग में आ सकती है दिक्कत
कुछ पुलिसकर्मियों और ड्राइवरों का कहना है कि सामने की ओर लगी जालियों से दृश्यता प्रभावित हो सकती है, खासकर रात के समय और संकरे रास्तों पर। इसी को ध्यान में रखते हुए जालियों को इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि जरूरत पड़ने पर उन्हें ऊपर उठाया या खोला जा सके, जिससे ड्राइविंग में अनावश्यक जोखिम न हो।
सुरक्षा को दी जा रही प्राथमिकता
पुलिस विभाग का स्पष्ट रुख है कि मौजूदा हालात में यह व्यवस्था समय की जरूरत है। कानून-व्यवस्था संभालते वक्त जवानों की जान सुरक्षित रहे, इसी सोच के साथ यह कदम उठाया गया है। आने वाले दिनों में इसे पूरे राज्य में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा सकता है।




