जम्मू। जम्मू-कश्मीर में मंगलवार को हुई मूसलाधार बारिश और भूस्खलन ने तबाही मचा दी। नदियां उफान पर हैं और निचले इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं।
अब तक की जानकारी के अनुसार, इस प्राकृतिक आपदा में 45 लोगों की मौत हो चुकी है और कई लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र वैष्णो देवी तीर्थ मार्ग रहा, जहां भूस्खलन ने कई जिंदगियां लील लीं।
700 से ज्यादा घर बर्बाद
भारी बारिश के चलते 700 से अधिक मकान पूरी तरह से ढह गए या बह गए। कई परिवारों के आशियाने उजड़ गए हैं। जगह-जगह सड़कों के टूटने और पुलों के क्षतिग्रस्त होने से परिवहन ठप हो गया है।
कई मुख्य मार्गों पर भूस्खलन और पत्थर गिरने की वजह से आवाजाही पूरी तरह से बंद है।
30 अगस्त तक स्कूल-कॉलेज बंद
हालात को देखते हुए जम्मू क्षेत्र के सभी स्कूल और कॉलेजों को 30 अगस्त तक बंद रखने का आदेश जारी किया गया है।
स्कूल एजुकेशन डायरेक्टर डॉ. नसीम जावेद चौधरी ने बताया कि जहां भी इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध है, वहां कक्षा 9 से 12 के छात्रों के लिए ऑनलाइन क्लासेस आयोजित की जाएंगी।
स्कूल परिसरों में जलभराव और कीचड़
निचले इलाकों में जलभराव और कीचड़ जमा होने से स्कूल परिसर पूरी तरह से प्रभावित हैं। वहीं, ऊपरी क्षेत्रों में भूस्खलन और पत्थरों के गिरने का खतरा बढ़ गया है, जिससे छात्रों और स्टाफ की सुरक्षा को देखते हुए संस्थान बंद रखने का फैसला किया गया।
राहत-बचाव कार्य जारी
राहत और बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी है। एनडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन की टीमें प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को निकाल रही हैं।
सड़क और पुलों को हुए नुकसान की वजह से राहत सामग्री पहुंचाने में दिक्कतें आ रही हैं, हालांकि बुधवार को बारिश कम होने के बाद ऑपरेशन तेज हो गया।