रायपुर जिले में मतदाता पहचान सुधार प्रक्रिया (SIR) पिछले करीब दो महीनों से चल रही है, लेकिन अपेक्षित सहयोग नहीं मिल पा रहा है। Raipur Voter Notice Issue के तहत जारी किए गए नोटिसों में से बड़ी संख्या में लोगों ने अब तक कोई जवाब नहीं दिया है, जिससे प्रशासन की चिंता बढ़ गई है।
1.33 लाख नोटिस, 80 फीसदी बिना जवाब
जिले में कुल 1.33 लाख मतदाताओं को दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए नोटिस जारी किए गए थे। प्रशासनिक आंकड़ों के मुताबिक, इनमें से लगभग 80 प्रतिशत मतदाताओं ने नोटिस का कोई जवाब नहीं दिया। Voter Verification Raipur की रफ्तार इसी कारण धीमी पड़ती नजर आ रही है।
नोटिस छोड़ नया रास्ता चुन रहे वोटर
नोटिस का जवाब देने के बजाय बड़ी संख्या में लोग फॉर्म-6 भरकर नए सिरे से नाम जोड़ने का विकल्प अपना रहे हैं। मतदाताओं का मानना है कि नए फॉर्म में दस्तावेज जमा करना अपेक्षाकृत आसान है। Form 6 Trend ने प्रशासन की योजना को उलझा दिया है।
अब घर-घर जाकर पूछताछ
स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने सभी बीएलओ को निर्देश दिया है कि वे संबंधित मतदान केंद्रों में घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क करें। BLO Door to Door Drive के तहत यह पूछा जाएगा कि नोटिस का जवाब क्यों नहीं दिया गया और किन दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
दस्तावेज जुटाने में मदद
अधिकारियों का कहना है कि बीएलओ केवल पूछताछ ही नहीं करेंगे, बल्कि मतदाताओं को जरूरी दस्तावेज जुटाने में भी सहायता देंगे। Document Assistance Plan का मकसद यह है कि नाम हटने या अटकने की स्थिति न बने।
काम, गरीबी और भरोसे की कमी
नोटिस की अनदेखी के पीछे कई सामाजिक कारण सामने आए हैं। चूंकि इस साल कोई चुनाव नहीं है, इसलिए कई मतदाता मानते हैं कि चुनाव के वक्त नाम अपने आप जुड़ जाएगा। Why Voters Ignore Notice के तहत यह भी सामने आया है कि अधिकांश प्रभावित लोग कामकाजी या गरीब वर्ग से हैं, जिनके पास समय और संसाधनों की कमी है।
व्यवहार और सुविधा बड़ा मुद्दा
कुछ मतदाताओं का कहना है कि बीएलओ के व्यवहार और प्रक्रिया की जटिलता भी बड़ी वजह है। वे चाहते हैं कि सरकारी सेवाएं घर तक आएं। Ground Reality of Voters ने मतदाता सुधार अभियान को जमीनी स्तर पर चुनौती दी है।




