सीजी भासकर 8 जनवरी। कांग्रेस के छत्तीसगढ़ प्रभारी सचिव Sachin Pilot ने केंद्र की भाजपा सरकार पर जोरदार हमला बोला (Sachin Pilot MNREGA Statement) है। एक दिवसीय दौरे पर रायपुर पहुंचे पायलट ने एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत के दौरान मनरेगा को लेकर सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार सुनियोजित तरीके से मनरेगा जैसी गरीबों की जीवनरेखा को कमजोर करने और धीरे-धीरे खत्म करने की दिशा में काम कर रही है।
सचिन पायलट ने कहा कि मनरेगा कभी ग्रामीण गरीबों के लिए सुरक्षा कवच हुआ करता था, जिसके तहत 100 दिनों का सुनिश्चित रोजगार मिलता था। लेकिन आज हालात ऐसे बना दिए गए हैं कि यह योजना कागजों तक सिमटती जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले जहां मनरेगा की पूरी राशि केंद्र सरकार वहन करती थी, वहीं अब उस व्यवस्था को भी खत्म कर दिया गया है। पायलट के मुताबिक, रोजगार के अधिकार को लगातार कमजोर किया जा रहा है और इसका सीधा असर गांवों के सबसे कमजोर वर्ग पर पड़ रहा है।
उन्होंने ग्राम पंचायतों के अधिकार छीने जाने का भी आरोप लगाया। पायलट ने कहा कि पहले मनरेगा के तहत कौन सा काम होगा, इसका फैसला ग्राम पंचायतें (Sachin Pilot MNREGA Statement) करती थीं, जिससे स्थानीय जरूरतों के हिसाब से रोजगार सृजन होता था। अब पूरी योजना को सेंट्रलाइज्ड कर दिया गया है और फंड पर भी केंद्र का पूरा नियंत्रण हो गया है, जिससे पंचायतें पूरी तरह बेबस हो चुकी हैं।
मनरेगा को लेकर भाजपा पर सीधा सवाल दागते हुए सचिन पायलट ने कहा कि अगर सरकार को इस योजना से कोई दिक्कत थी, तो मजदूरी दर बढ़ाई जाती, काम के दिन बढ़ाए जाते। लेकिन इसके उलट सरकार ने योजना को ही खत्म करने का रास्ता चुन लिया। उन्होंने इसे गरीब जनता के साथ अन्याय करार दिया।
महात्मा गांधी के नाम से जुड़ी योजना को लेकर पायलट ने कहा कि यह पहली बार है जब गांधी जी के नाम से जुड़ी किसी योजना की मूल भावना को ही बदल दिया गया है। उनके मुताबिक, मनरेगा सिर्फ रोजगार देने की योजना नहीं थी, बल्कि यह गरीबों की गरिमा और आत्मसम्मान से जुड़ी हुई थी, जिस पर सीधा हमला किया गया है।
भाजपा पर हमला तेज करते हुए पायलट ने कहा कि सत्ता में आने के बाद पार्टी के नेताओं में घमंड आ गया है। उन्होंने कहा कि खंडित जनादेश के बावजूद सरकार का रवैया अहंकारी है, लेकिन देश की जनता सब देख रही है और समय आने पर जवाब जरूर देगी।
कमिश्नर प्रणाली को लेकर पूछे गए सवाल पर भी पायलट ने सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि ऐसे फैसले केवल सुर्खियां बटोरने के लिए लिए जा रहे हैं और इनका नीतिगत सुधारों से कोई लेना-देना नहीं है। पायलट के मुताबिक, यह जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश भर है।
मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के न्यायालयों को बम से उड़ाने की धमकियों के मामले पर भी सचिन पायलट ने सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि भाजपा के नेता भले ही कानून-व्यवस्था को लेकर अपनी पीठ थपथपाते हों, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग (Sachin Pilot MNREGA Statement) है। महिलाओं, बुजुर्गों और मध्यम वर्ग में असुरक्षा का भाव बढ़ रहा है और सरकार लोगों के मन में सुरक्षा का भरोसा पैदा करने में पूरी तरह नाकाम रही है। न्यायालय जैसी संवैधानिक संस्थाओं को धमकियां मिलना सीधे तौर पर शासन-प्रशासन की विफलता को दर्शाता है।
जंबूरी 2026 विवाद और हाईकोर्ट में दायर याचिका को लेकर भी पायलट ने सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मुद्दा यह नहीं है कि भाजपा का कौन सा नेता क्या कर रहा है, बल्कि असली सवाल जनता के पैसे का है। पायलट ने आरोप लगाया कि बिना टेंडर के काम कराए जा रहे हैं और भ्रष्टाचार सरकार की नाक के नीचे फल-फूल रहा है, लेकिन आंखें मूंद ली गई हैं।
संगठनात्मक मुद्दों पर बोलते हुए सचिन पायलट ने कहा कि कांग्रेस लगातार संगठन को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। कई राज्यों में जिला अध्यक्षों की ट्रेनिंग पूरी हो चुकी है और छत्तीसगढ़ में भी सभी जिलों में नए अध्यक्षों की नियुक्ति के बाद उन्हें काम का रोडमैप दे दिया गया है। उन्होंने बताया कि जल्द ही छत्तीसगढ़ में भी जिला अध्यक्षों की ट्रेनिंग कराई जाएगी।
रायपुर दौरे के दौरान सचिन पायलट मनरेगा आंदोलन की समीक्षा के साथ-साथ संगठनात्मक बैठकों में भी हिस्सा लेंगे। नवनियुक्त जिलाध्यक्षों से मुलाकात और आगामी रणनीति पर चर्चा उनके कार्यक्रम का अहम हिस्सा है। कुल मिलाकर, यह दौरा मनरेगा के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरने और कांग्रेस की आक्रामक राजनीतिक रणनीति को धार देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।




