सीजी भास्कर 11 फ़रवरी । सरगुजा जिले में स्थित SECL की अमेरा कोल माइंस इन दिनों कोयला माफियाओं के कब्जे में होने की चर्चाओं (SECL Coal Theft) के केंद्र में है। आरोप है कि माफियाओं के संरक्षण में पूरा गांव कोयला चोरी के धंधे में झोंक दिया गया है। हालात ऐसे हैं कि हर दिन 300 टन से अधिक कोयले की अवैध निकासी की जा रही है, जिससे SECL को हर महीने करीब 5 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसके बावजूद चोरी पर प्रभावी रोक नहीं लग पा रही है।
ईंट-भट्टों की आड़ में संगठित खेल
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, कोयला माफिया ईंट-भट्टों को ढाल बनाकर बड़े पैमाने पर चोरी का खेल चला रहे हैं। गांव के पुरुषों के साथ-साथ महिलाएं और बच्चे तक खदानों में भेजे जा रहे हैं। चोरी किया गया कोयला पहले आसपास जमा किया जाता है, फिर ट्रकों के जरिए ईंट-भट्टों, कोल डिपो और दूसरे शहरों में सप्लाई कर दिया जाता है।
बताया जाता है कि यह अवैध कोयला न सिर्फ स्थानीय भट्टों में खपाया जा रहा है, बल्कि रायपुर, बिलासपुर और बनारस जैसे शहरों तक इसकी आपूर्ति हो रही है। इस पूरे नेटवर्क में कुछ कोल डिपो संचालकों की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है, जो दस्तावेज उपलब्ध कराकर अवैध कोयले को “वैध” बना देते हैं।
जनवरी से मई तक सक्रिय रहते हैं माफिया
सरगुजा क्षेत्र में यह कोई नई बात नहीं है। हर साल जनवरी से मई के बीच कोल माफिया संगठित तरीके से चोरी को अंजाम देते हैं। पहले गांव वालों से सस्ते दामों पर कोयला (SECL Coal Theft) खरीदा जाता है, फिर ट्रकों में भरकर इसे आगे खपाया जाता है। चर्चा है कि इस पूरे कारोबार को राजनीतिक संरक्षण भी प्राप्त है, जिसकी वजह से कार्रवाई कमजोर पड़ जाती है।
प्रशासनिक चुप्पी पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस के निचले स्तर के अधिकारी माफियाओं पर हाथ डालने से कतराते हैं, वहीं खनिज विभाग के कुछ अधिकारी भी कार्रवाई के बजाय आंख मूंदे हुए हैं। SECL प्रबंधन की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि माइंस क्षेत्र में चोरी खुलेआम हो रही है, लेकिन अधिकारी केवल कागजी पत्राचार और दिखावटी पेट्रोलिंग तक सीमित हैं।
माइंस एक्सटेंशन के बाद बढ़ी गतिविधि
पिछले महीने अमेरा कोल माइंस का एक्सटेंशन होने के बाद खनन कार्य दोबारा शुरू हुआ है। इसके साथ ही कोयला माफिया भी एक बार फिर सक्रिय हो गए हैं। गांव के सैकड़ों लोग सीधे खदानों में पहुंचकर (SECL Coal Theft) कोयला निकाल रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जिसने मामले को और गंभीर बना दिया है।
अब बड़ा सवाल यह है कि करोड़ों रुपये के नुकसान और खुलेआम हो रही चोरी के बावजूद SECL प्रबंधन, खनिज विभाग और पुलिस कब तक चुप्पी साधे रहेंगे। अगर समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो यह अवैध कारोबार और गहराता चला जाएगा।




