सीजी भास्कर, 1 मार्च। 3 मार्च 2026 को लगने वाले साल के पहले चंद्रग्रहण से ठीक एक दिन पहले यानी 2 मार्च को ग्रहों की चाल बड़ा संकेत (Shadashtak Yog 2026) दे रही है। इस दिन शुक्र का गोचर मीन राशि में और चंद्रमा का गोचर सिंह राशि में होगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब दो ग्रह छठे और आठवें भाव के संबंध में आते हैं तो षडाष्टक योग बनता है, जिसे शुभ नहीं माना जाता। ऐसे में ग्रहण से पहले बना यह योग कुछ राशियों के लिए मानसिक, आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां ला सकता है।
सिंह राशि: मानसिक अस्थिरता और निर्णय में सावधानी
सिंह राशि में चंद्रमा का गोचर और उसी राशि में ग्रहण का प्रभाव मानसिक बेचैनी बढ़ा सकता है। बड़े निवेश, नई शुरुआत या महत्वपूर्ण फैसलों को कुछ समय टालना बेहतर रहेगा। सेहत में उतार-चढ़ाव संभव है। उपाय के रूप में चंद्र मंत्रों का जप और सोमवार को सफेद वस्तुओं का दान लाभकारी माना गया है।
तुला राशि: धन और कार्यक्षेत्र में सतर्कता जरूरी
तुला राशि के जातकों को आर्थिक मामलों में सावधानी बरतनी होगी। अनावश्यक खर्च और जोखिम भरे निवेश से बचें। नौकरीपेशा लोगों के लिए कार्यस्थल पर जवाबदेही (Shadashtak Yog 2026) बढ़ सकती है, इसलिए हर काम सोच-समझकर करें। भगवान शिव की पूजा और शुक्रवार को सुगंधित पुष्प अर्पित करना शुभ माना गया है।
मीन राशि: रुके काम और वाणी पर नियंत्रण
मीन राशि में शुक्र का गोचर होने से भावनात्मक संवेदनशीलता बढ़ सकती है, लेकिन षडाष्टक संबंध के कारण कार्यों में रुकावट आ सकती है। सामाजिक स्तर पर बोलचाल में संयम जरूरी रहेगा, अन्यथा प्रतिष्ठा प्रभावित हो सकती है। पेट और गले से जुड़ी समस्याओं का ध्यान रखें। छोटी कन्याओं को उपहार या मिठाई देना शुभ फल दे सकता है।
ज्योतिषीय संकेत क्या कहते हैं?
षडाष्टक योग आमतौर पर टकराव, असमंजस और आंतरिक तनाव का संकेत (Shadashtak Yog 2026) देता है। हालांकि यह प्रभाव स्थायी नहीं होता, लेकिन ग्रहण काल के आसपास सतर्कता और धैर्य रखना आवश्यक माना जाता है।






