सीजी भास्कर, 26 अगस्त : उपराष्ट्रपति पद के विपक्षी साझा उम्मीदवार सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस बी. सुदर्शन रेड्डी पर गृह मंत्री अमित शाह द्वारा उठाए गए सवालों को शीर्ष कोर्ट और हाई कोर्ट के 16 पूर्व न्यायाधीशों ने दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है। पूर्व न्यायाधीशों ने गृह मंत्री की टिप्पणी को पूर्वाग्रह से ग्रसित बताया और कहा कि इससे न्यायपालिका पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है और न्यायिक स्वतंत्रता खतरे में पड़ सकती है। यह पूरे मामले में (Shah Comment Controversy) को लेकर गंभीर चिंता जताई गई है।
गृह मंत्री ने आरोप लगाया था कि जस्टिस सुदर्शन रेड्डी ने माओवाद के खिलाफ लड़ाई को कमजोर किया और यदि सलवा जुडूम मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला प्रतिकूल न होता तो माओवाद 2020 तक समाप्त हो जाता। इन टिप्पणियों के जवाब में पूर्व न्यायाधीशों ने संयुक्त बयान जारी किया और कहा कि यह फैसला न तो नक्सलवाद का समर्थन करता है और न ही उसकी विचारधारा का। उन्होंने यह भी कहा कि उपराष्ट्रपति पद के प्रचार अभियान वैचारिक हो सकते हैं, लेकिन इसे शालीनता और गरिमा के साथ चलाया जाना चाहिए और किसी उम्मीदवार की विचारधारा पर अनावश्यक हमला नहीं होना चाहिए। इस पूरे विवाद में (Shah Comment Controversy) के असर पर जोर दिया गया।
इस बयान में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश एके पटनायक, अभय ओका, गोपाल गौड़ा, विक्रमजीत सेन, कुरियन जोसेफ, मदन बी लोकुर और जे. चेलमेश्वर तथा हाई कोर्ट के तीन रिटायर मुख्य न्यायाधीश—गोविंद माथुर, एस. मुरलीधर और संजीव बनर्जी समेत सात अन्य न्यायाधीश शामिल हैं।