सीजी भास्कर, 4 जनवरी। बीएमसी चुनाव से पहले महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के बीच गठबंधन के बाद एमएनएस प्रमुख राज ठाकरे करीब 20 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद दादर स्थित शिवसेना (यूबीटी) मुख्यालय शिवसेना भवन (Shiv Sena Bhavan) पहुंचे। इस मौके पर आयोजित संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में राज ठाकरे, उद्धव ठाकरे और संजय राउत एक मंच पर नजर आए।
प्रेस वार्ता (Shiv Sena Bhavan) के दौरान राज ठाकरे ने भावुक अंदाज में कहा कि 20 साल बाद शिवसेना भवन आकर ऐसा लग रहा है जैसे जेल से बाहर आया हूं। उन्होंने कहा कि हर कोई यही पूछ रहा है कि इतने वर्षों बाद यहां आकर कैसा महसूस हो रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि इस भवन से उनकी गहरी और पुरानी यादें जुड़ी हैं, जिन्हें शब्दों में समेटना आसान नहीं है।
राज ठाकरे ने 1977 की घटना को याद करते हुए बताया कि जब शिवसेना भवन बना था, तब जनता पार्टी ने यहां जुलूस निकालकर पत्थरबाजी की थी, जिसका शिवसैनिकों ने ऊपर से ट्यूबलाइट फेंककर जवाब दिया था। उन्होंने कहा कि शिवसेना भवन केवल एक इमारत नहीं, बल्कि संघर्ष और आंदोलन का साक्षी रहा है।
उद्धव ठाकरे ने गठबंधन पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि दोनों दलों का एक साथ आना पूरे महाराष्ट्र के लिए सकारात्मक संदेश है। उन्होंने कहा कि संयुक्त घोषणापत्र जनता के चरणों में समर्पित किया गया है। लोकतंत्र पर चिंता जताते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि पहले वोट चोरी हुई और अब उम्मीदवार चोरी किए जा रहे हैं।
बीजेपी पर निशाना साधते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि सत्ताधारी दल उम्मीदवारों को निर्विरोध जिताने की होड़ में लगा है। विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि स्पीकर को अपनी शक्तियों का इस्तेमाल सदन के भीतर करना चाहिए, न कि सड़कों पर।
मुंबई के मेयर पद को लेकर चल रही बहस पर उद्धव ठाकरे ने कहा कि मुंबई का मेयर मराठी ही होगा, लेकिन बीजेपी को यह बताना चाहिए कि सत्ता में रहते हुए उसने किसे डिप्टी मेयर बनाया था। वहीं राज ठाकरे ने कहा कि महाराष्ट्र को यूपी-बिहार जैसा बनाने की कोशिश खतरनाक है और सभी दलों को इस पर गंभीरता से सोचना चाहिए।
महाराष्ट्र को UP–बिहार बनाने की कोशिश खतरनाक : राज ठाकरे
मुंबई में आयोजित संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे ने तीखे शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि कोई भी सत्ता में हमेशा के लिए नहीं रहता और आज सत्ता में बैठे लोगों को यह सोचना चाहिए कि जब वे बाहर होंगे तो क्या करेंगे। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र को यूपी–बिहार बनाने की कोशिश हो रही है, जो राज्य के भविष्य के लिए दुर्भाग्यपूर्ण और बेहद खतरनाक है। राज ठाकरे ने कहा कि सभी राजनीतिक दलों को इस स्थिति पर गंभीरता से विचार करना चाहिए, क्योंकि इसका सीधा असर महाराष्ट्र की पहचान, संस्कृति और सामाजिक संतुलन पर पड़ रहा है।
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि वडोदरा में हर बार मेयर गुजराती ही क्यों होता है, जबकि उस क्षेत्र में मराठा साम्राज्य का ऐतिहासिक प्रभाव रहा है। इसके बावजूद वहां कभी यह सवाल नहीं उठता कि मेयर किस समुदाय या भाषा का होना चाहिए। वहीं मुंबई के मेयर को लेकर बार-बार मराठी होने या न होने का मुद्दा खड़ा किया जाता है, जो समझ से परे है। राज ठाकरे ने कहा कि महाराष्ट्र की अस्मिता से जुड़े सवालों पर राजनीति नहीं होनी चाहिए और सत्ता में बैठे लोगों को राज्य के दीर्घकालिक हितों को ध्यान में रखकर फैसले लेने चाहिए।


