सीजी भास्कर, 22 जून। महाराष्ट्र की राजनीति में रविवार को अचानक हुए एक घटनाक्रम ने सियासी हलकों में हलचल (Shiv Sena Split) बढ़ा दी। लंबे समय से चल रही अटकलों के बीच शिवसेना यूबीटी को बड़ा झटका लगा है। दिनभर राजनीतिक गलियारों में जिस चर्चा ने जोर पकड़ा हुआ था, वह शाम होते होते हकीकत में बदल गई और इसके बाद आरोप प्रत्यारोप का दौर भी शुरू हो गया।
इस घटनाक्रम के बाद राज्य की राजनीति में नए समीकरणों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। राजनीतिक जानकार इसे आगामी चुनावों और संगठनात्मक मजबूती से जोड़कर देख रहे हैं। वहीं दोनों पक्षों के नेताओं के बयान भी सामने आने लगे हैं।
महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना यूबीटी के छह सांसदों ने एकनाथ शिंदे गुट का दामन थाम लिया है। इस घटनाक्रम को पार्टी के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। सांसदों के शिंदे गुट में शामिल होने के बाद राज्य की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है।
इन सांसदों ने थामा शिंदे गुट का हाथ Shiv Sena Split
शिवसेना यूबीटी छोड़कर शिंदे गुट में शामिल होने वाले सांसदों में संजय हरिभाऊ जाधव, भाऊसाहेब राजाराम वाकचौरे, ओमप्रकाश भूपालसिंह निंबालकर, संजय दीना पाटिल, संजय उत्तमराव देशमुख और नागेश बापुराव पाटिल अष्टिकर शामिल हैं।
इन नेताओं के शामिल होने के बाद शिंदे गुट की राजनीतिक ताकत बढ़ने की चर्चा शुरू हो गई है। माना जा रहा है कि इसका असर आने वाले राजनीतिक समीकरणों पर भी पड़ सकता है।
शिंदे बोले, शिवसेना एक परिवार
सांसदों के शामिल होने के बाद महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे ने कहा कि आज छह सांसद उनके साथ जुड़े हैं और सभी आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन किया गया है।
उन्होंने कहा कि शिवसेना एक परिवार है और अब उनके साथ छह नए साथी जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पार्टी कोई काम अधूरा नहीं छोड़ती और पूरी प्रक्रिया के बाद ही यह कदम सामने आया है।
ऑपरेशन टाइगर की चर्चा फिर तेज
पिछले कुछ समय से महाराष्ट्र की राजनीति में ऑपरेशन टाइगर को लेकर (Shiv Sena Split) चर्चाएं चल रही थीं। राजनीतिक हलकों में माना जा रहा था कि इससे शिवसेना यूबीटी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। अब छह सांसदों के शिंदे गुट में शामिल होने के बाद इन चर्चाओं को और बल मिला है। विश्लेषकों का मानना है कि इस घटनाक्रम से शिंदे गुट को संगठनात्मक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर मजबूती मिल सकती है।
आदित्य ठाकरे ने जताई नाराजगी
इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए शिवसेना यूबीटी नेता आदित्य ठाकरे ने सांसदों के फैसले की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित सांसदों ने मतदाताओं के भरोसे को चोट पहुंचाई है।
आदित्य ठाकरे ने कहा कि इन नेताओं को महा विकास अघाड़ी और विपक्षी गठबंधन के समर्थन से सफलता मिली थी। ऐसे में उनका यह फैसला जनता और कार्यकर्ताओं की भावनाओं के विपरीत है।
संजय निरुपम ने भी साधा निशाना
शिवसेना नेता संजय निरुपम ने भी इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जो सांसद शिंदे गुट में शामिल हुए हैं, उनकी अपनी राजनीतिक ताकत है और आने वाले समय में उन्हें व्यापक समर्थन मिलेगा।
उन्होंने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व पर भी सवाल उठाते हुए दावा किया कि पार्टी के भीतर असंतोष लगातार बढ़ रहा है। हालांकि इस मुद्दे पर शिवसेना यूबीटी की ओर से भी लगातार पलटवार किया जा रहा है।
बदल सकते हैं राजनीतिक समीकरण
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि छह सांसदों के एक साथ पाला बदलने से महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरण बन (Shiv Sena Split) सकते हैं। आने वाले समय में इसका असर संगठनात्मक ढांचे, गठबंधनों और चुनावी रणनीतियों पर भी देखने को मिल सकता है।
फिलहाल इस घटनाक्रम के बाद राज्य की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है और सभी की नजर आगे होने वाले राजनीतिक घटनाक्रम पर टिकी हुई है।





