नई दिल्ली।
दिल्ली के रामलीला मैदान में रविवार को SSC (स्टाफ सेलेक्शन कमीशन) परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ छात्रों ने जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनातनी देखने को मिली।
कई छात्रों को हिरासत में भी लिया गया। मामला बढ़ने पर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि मोदी सरकार छात्रों की आवाज दबाने के लिए पुलिस का इस्तेमाल कर रही है।कांग्रेस का केंद्र पर वार
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि छात्र लंबे समय से एसएससी भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार ने उनकी आवाज सुनने के बजाय पुलिस भेजकर आंदोलन को कुचलने की कोशिश की।
पार्टी ने आरोप लगाया कि छात्रों और छात्राओं को बेरहमी से पिटवाया गया, जो लोकतंत्र के लिए शर्मनाक है।कांग्रेस ने यह भी कहा कि युवा पीढ़ी की जायज मांगों को नजरअंदाज करना सरकार की संवेदनहीनता को दर्शाता है।छात्रों का आरोप – “हमें जबरन हटाया गया”
प्रदर्शन में शामिल छात्रों ने दावा किया कि पुलिस ने उन्हें जबरन धरनास्थल से हटाया। कई वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुईं, जिनमें बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं प्रदर्शन करते दिखे।
छात्रों ने आरोप लगाया कि भर्ती परीक्षाओं में लगातार धांधली और प्रशासनिक विफलताएं हो रही हैं। उनका कहना है कि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं है और यही कारण है कि उन्हें मजबूरन सड़कों पर उतरना पड़ा।पुलिस का पक्ष
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, करीब 1,500 छात्र रामलीला मैदान में इकट्ठा हुए थे। बार-बार अनुरोध और निर्धारित समय खत्म होने के बावजूद जब कुछ छात्र हटने को तैयार नहीं हुए, तो करीब 44 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेना पड़ा।
पुलिस ने किसी भी तरह की ज्यादती से इनकार किया और कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई की गई।भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता पर सवाल
यह विरोध प्रदर्शन एक बार फिर इस मुद्दे को उजागर करता है कि भारत में भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया को लेकर युवाओं का भरोसा लगातार कम हो रहा है। छात्र संगठनों का कहना है
कि एसएससी परीक्षा प्रणाली में सुधार और निष्पक्षता सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है, ताकि लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य सुरक्षित हो सके।





