State Administrative Promotion: राज्य प्रशासनिक सेवा में पदोन्नति को लेकर मंत्रालय में आयोजित विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक में बड़ा निर्णय लिया गया। विभिन्न संवर्गों पर चर्चा के बाद कुल 79 अधिकारियों को पदोन्नति देने की सिफारिश की गई, जबकि 25 अधिकारियों के मामलों को विभागीय जांच और प्रतिकूल गोपनीय प्रविष्टियों के चलते फिलहाल रोक दिया गया है। सभी स्वीकृत पदोन्नतियां एक जनवरी 2026 से प्रभावी मानी जाएंगी।
डिप्टी कलेक्टर से संयुक्त कलेक्टर तक का गणित
बैठक में डिप्टी कलेक्टर से संयुक्त कलेक्टर पद के लिए नौ अधिकारियों के नाम रखे गए। इनमें से सात अधिकारियों को पदोन्नति के लिए उपयुक्त पाया गया, जबकि दो मामलों को लंबित रखते हुए आगे की समीक्षा के लिए रोक दिया गया। प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, लंबित मामलों में सतर्कता और सेवा रिकॉर्ड से जुड़े बिंदु शामिल हैं।
संयुक्त कलेक्टर से अतिरिक्त कलेक्टर तक 72 नाम मंजूर
संयुक्त कलेक्टर से अतिरिक्त कलेक्टर पदोन्नति के लिए 72 अधिकारियों को मंजूरी दी गई। इस स्तर पर 13 अधिकारी आवश्यक मानकों को पूरा नहीं कर पाए। इसके अलावा, पांच अधिकारियों को उच्च पद का वेतनमान देने का निर्णय लिया गया, जबकि पांच मामलों को फिलहाल स्थगित रखा गया। यह निर्णय (Civil Service Promotion) प्रक्रिया में संतुलन और नियमों के पालन को दर्शाता है।
पुलिस सेवा की DPC बैठक भी तय, 19 दिसंबर को मंथन
इसी क्रम में पुलिस सेवा के अधिकारियों की विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक 19 दिसंबर को प्रस्तावित है। बैठक में तीन अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक को विशेष महानिदेशक, दो पुलिस महानिरीक्षक को अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, 16 पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारियों को उप पुलिस महानिरीक्षक तथा आठ अधिकारियों को सलेक्शन ग्रेड देने पर विचार किया जाएगा। प्रशासनिक हलकों में इस बैठक को भी अहम माना जा रहा है।
सेवा रिकॉर्ड और जांच रिपोर्ट बनी आधारशिला
अधिकारियों का कहना है कि पदोन्नति प्रक्रिया पूरी तरह सेवा नियमों, गोपनीय प्रतिवेदन और लंबित मामलों की स्थिति के आधार पर की गई है। जिन मामलों को रोका गया है, उनमें स्पष्ट किया गया है कि जांच या दस्तावेज़ी स्थिति साफ होने के बाद पुनः विचार किया जा सकता है। यह पूरा निर्णय (DPC Meeting) की पारदर्शी कार्यप्रणाली को रेखांकित करता है।





