सीजी भास्कर, 10 जनवरी। राज्य सरकार ने लंबे समय से रिक्त पड़े मुख्य सूचना आयुक्त (State Information Commission Chhattisgarh) के पद पर आखिरकार नियुक्ति कर दी है। देर रात जारी आदेश के अनुसार, राज्य के पूर्व मुख्य सचिव और सेवानिवृत्त वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अमिताभ जैन को छत्तीसगढ़ का मुख्य सूचना आयुक्त नियुक्त किया गया है। इस निर्णय के साथ ही राज्य सूचना आयोग को पूर्ण स्वरूप प्रदान करने की दिशा में सरकार ने अहम कदम उठाया है।
इसी आदेश के तहत सचिव स्तर से सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी उमेश अग्रवाल तथा वरिष्ठ पत्रकार डॉ. शिरीष चंद्र मिश्रा को राज्य सूचना आयुक्त नियुक्त (State Information Commission Chhattisgarh) किया गया है। इन नियुक्तियों के साथ ही छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग में लंबे समय से चली आ रही रिक्तियों का समाधान हो सका है।
मुख्य सूचना आयुक्त और राज्य सूचना आयुक्तों के इन पदों के लिए 4 मार्च 2025 को आवेदन आमंत्रित किए गए थे। हालांकि, चयन प्रक्रिया के दौरान मामला हाईकोर्ट पहुंच जाने के कारण नियुक्तियां लंबे समय तक रुकी रहीं। हाईकोर्ट द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बाद शासन ने चयन प्रक्रिया को पुनः आगे बढ़ाया और अब औपचारिक रूप से नियुक्ति आदेश जारी किए गए हैं।
बताया गया है कि मुख्य सूचना आयुक्त के पद के लिए पूर्व मुख्य सचिव अमिताभ जैन प्रमुख दावेदार माने जा रहे थे। उनके अलावा सेवानिवृत्त डीजीपी अशोक जुनेजा ने भी इस पद के लिए दावेदारी प्रस्तुत की थी। अंततः सरकार ने प्रशासनिक अनुभव और वरिष्ठता को प्राथमिकता देते हुए अमिताभ जैन के नाम पर मुहर लगाई।
वहीं, छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग (State Information Commission Chhattisgarh) में राज्य सूचना आयुक्त के दो पद रिक्त थे, जिनके लिए कुल 72 आवेदकों ने आवेदन किए थे। इन आवेदकों में कई सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी और वरिष्ठ पत्रकार शामिल थे। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा आवेदनों की प्रारंभिक जांच कर सूची तैयार की गई थी, लेकिन अनुभव और मापदंडों को लेकर हाईकोर्ट में चुनौती दी गई, जिससे प्रक्रिया बाधित हो गई थी। याचिका निरस्त होने के बाद चयन प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए अब नियुक्तियां की गई हैं।
नियुक्ति आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि संबंधित अधिकारी कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से पदस्थ माने जाएंगे। इन सभी नियुक्तियों पर केंद्रीय सूचना आयोग एवं राज्य सूचना आयोग से संबंधित नियमों के तहत पदावधि, वेतन, भत्ते तथा सेवा की अन्य शर्तें लागू होंगी। राज्य सरकार के इस फैसले को सूचना के अधिकार अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन और सूचना आयोग की कार्यप्रणाली को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


