सीजी भास्कर , 18 अप्रैल
बस्तर जिले में बाल विवाह के खिलाफ प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए पहली बार बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की है। मामला 21 मार्च 2026 को हुए एक विवाह समारोह से जुड़ा है, जो शुरुआत में सामान्य शादी लग रही थी, लेकिन शिकायत मिलने के बाद जांच शुरू की गई।
जांच में नाबालिग वधु का खुलासा
जांच के दौरान यह सामने आया कि वधु की उम्र 18 वर्ष से कम थी। उम्र के सत्यापन के बाद बाल संरक्षण विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए वर और वधु पक्ष के कुल 5 लोगों को आरोपी बनाया है।
पहले समझाइश, अब सख्त कार्रवाई
जानकारी के अनुसार जिले में पिछले चार वर्षों में करीब 15 बाल विवाह के मामले सामने आए हैं। पहले ऐसे मामलों में समझाइश देकर छोड़ दिया जाता था, लेकिन इस बार प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि कानून से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
कानूनी प्रावधान और सजा
नियमों के अनुसार 18 वर्ष से कम उम्र की लड़की और 21 वर्ष से कम उम्र के लड़के की शादी अपराध है। ऐसे मामलों में दोषियों को दो साल तक की सजा या एक लाख रुपए तक का जुर्माना हो सकता है। प्रशासन की यह कार्रवाई सामाजिक सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।


